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कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है

  कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है 

 

भाषांतरः यथा इस आयत पाक में नूर से तात्पर्य इमाम तथा मुरशिद है जिस की पैरवी व आज्ञापालन की जाए तथा जो उदाहरण उस व्यक्ति की दी गई के अँधेरों से निकल नहीं सकता इस से तात्पर्य व अर्थ वह व्यक्ति है जो इमाम को ना पहचाने यथा जो व्यक्ति पीर की तलाश ना कर जो इस का भाग्य एवं इमाम हो सके वह हमेशा गुमराही की अँधेरापन में पड़ा रहेगा। 

 

अतः इमाम वही है जो सालिक को तहक़ीक़ व अनुसंधान की राह व मार्ग में उच्च दर्जे पर ले जाए। 

 

 

{मक़ासिद उल इस्लाम, जिल्द 06, पः 28}


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