ARTICLES

BOOKS

SHAYKH Ul ISLAM LIFE HOME ENGLISH URDU
 
 
Share |
List of Articles
  SI: 24   
शैतान की दुश्मनी  

  SI: 23   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 22   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 21   
कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है  

  SI: 20   
ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है  

  SI: 19   
धर्म के पूर्वजों का वज्द  

  SI: 18   
दोज़ख़ का हाल  

  SI: 17   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 16   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 15   
ईमानी हालत का उदाहरण  

Heading :
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान

  सुरह नास की तफसीर

अऔज़ का बयान

 

अऔज़ यानी पनाह माँगता हुँ मैं।  पनाह जो किसी से चाही जाती है उस का मंशा ये होता है के कोई ऐसी मज़्र (तकलीफ देने वाली) चीज़ इस के पेश नज़र हो जाती है जिस की मखावमत नहीं कर सकता।  तथा अपने में ये शक्ति नहीं पाता के उस का मुक़ाबला कर सके। 

 

इस लिए किसी ऐसे व्यक्ति को तलाश करता है जो उस का मुक़ाबला कर के उस के शर और आफत से बचा सके।  जिस चीज़ से ख़ौफ़ व भय होता है उस को मअव्वुज़ मिन्ह केहते हैं तथा बचाने वाले को मुअव्वुज़ बिह।  इस आयत पाक में मअव्वुज़ मिन्ह शैतान का शर है।  और मुअव्वुज़ बिह अल्लाह तआला।

 

अल्लाह तआला ने इस सुरह में शिक्षा दी है के शैतान के शर से हमारे पास पनाह लो, क्यों के हम परवरिश करने वाले भी हैं तथा राजा भी है थता मअबुद भी।  इन गुण के वर्णन फरमाने से मालूम होता है के शैतान की वसवसे अंदाज़ी के मौक़े यही गुण हैं। 

 

पेहले रबुबियत ईलाही से संबंध वसवसे ड़ालता है तथा जहाँ तक हो सके ये कोशिश करता है के अल्लाह तआला की रबुबियत ज़हन-नशीन ना होने पाए, क्यों के आदमी बल्कि जानवर की भी तबियत का ये परिणाम है के अपनी परवरिश करने वाले के साथ दिल से मुहब्बत रखता है तथा इस की रबुबियत को मानता है तथा इस की किसी बात को नहीं टालता। 

 

देख लीजिए जो लोग हज़ार बारह 100 रुपय माहवार पाते हैं वह अपने सरदार की बात पर जान तक दे देते हैं। 

 

शैतान को बड़ी चिन्ता इस कर्म की लगी रहती है के यदि ये मान लिया जाए के अल्लाह तआला असली रब और परवरिश करने वाला है तो उस से कमाल दर्जे की मुहब्बत हो जाएगी तथा जो कुछ इस के इरशादात हैं सब मान लिए जाएँगे विशेष रूप से पाँचो समय की नमाज़, रोज़े और हज्ज व ज़कात आदि धर्म के ज़रुरियात के लोग पाबंद हो जाएँगे तथा जितनी बुरी बातें हैं सब छोड़ देंगे जिस से अल्लाह तआला क कृपा के योग्य हो जाएँगे। 

 

और इस का उद्देश्य जो आदम अलैहिस सलाम की औलाद को तबाह करना है फौत (समाप्त) हो जाएगा।  इस लिए सामान्य रूप से मुसलमानों के सोंच-विचार को भी अल्लाह तआला की ओर सम्पर्क होने नहीं देता।  बल्कि जब कोई अवश्यकता व ज़रूरत पेश होती है उस समय ये समझाता है के फलां के पास चलो और फलां से मदद लो और फलां प्रकार का कार्य करो। 

 

अतः एक ऐसा सिलसिला स्थापित कर देता है के नौबीत ही नहीं आती के अल्लाह तआला की रबुबियत पेश नज़र हो।  फिर यदि अवश्यकता रवाई हो गई तो तो इन को साधन व माध्यम सफलता घोषित देता है।  तथा ये सिलसिला इस के विचार को कुछ ऐसा पाबंद बनाता है के जैसे पाबा ज़जीर हो कर आदमी इसी क़ैद-खाने में पड़ा रेहता है, तथा यदि रबुबियत ईलाही का कभी विचार आ भी गया तो वह ऐसा होता है जैसे बिना आवश्यकता बहुत सारे विचार हमेशा आते रेहते हैं तथा उन का कोई असर नहीं होता। 

 

ऐसे लोगों की हिदायत व मार्गदर्शन के लिए आदेश हुआ केः जब लोगों की रबुबियत तुम्हारे पेश नज़र हो जाए तथा शैतान का अफसों तुम पर असर कर जाते तो रब्बिन नास की पनाह में आ जाओ तथा ये समझ लो के असल रबुबियत मुक़ैदह अल्लाह तआला ही की रबुबियत है। 

 

जब रबुबियत मुतलक़ा के मैदान में क़दम बढ़ाओगे तो तुम्हें शैतान के शर से जिस ने तुम्हें क़ैदी बना रखा है पनाह मिल जाएगी।  परन्तु कठिन ये है के पनाह लेने की आवश्यकता ही प्रत्येक व्यक् को महसूस नहीं होती। 

 

सिलसिला जारी रहेगा..

{मक़ासिद उल इस्लाम, जिल्द 08, पः 15-16}


submit

Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights reserved