ARTICLES

BOOKS

SHAYKH Ul ISLAM LIFE HOME ENGLISH URDU
 
 
Share |
List of Articles
  SI: 24   
शैतान की दुश्मनी  

  SI: 23   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 22   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 21   
कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है  

  SI: 20   
ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है  

  SI: 19   
धर्म के पूर्वजों का वज्द  

  SI: 18   
दोज़ख़ का हाल  

  SI: 17   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 16   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 15   
ईमानी हालत का उदाहरण  

Heading :
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

  पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 

ये अवश्य नहीं के सब मुसलमान फक़ीर ही हो जाएँ।  हर चंद मुसलमान के लिए तवंगिरी व मालदारी भी कोई बुरी चीज़ नहीं, परन्तु जो अर्थपूर्ण रूप से गुण फक़्र में हैं वह मालदारी में कहाँ। 

 

इस लिए हुज़ूर पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम अपने और अपने अहले-बैत के लिए फक़्र व गरीबी को पसंद करते थे।  जैसा के शिफा में बुखारी और मुसलिम से व्याख्या किया है हज़रत नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ये दुआ किया करते थेः-

 

भाषांतरः अए अल्लाह ! मुहम्मद (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) के आल (वंश) का रिज़्ख अवश्यकता के अनुसर निर्धारित कर। 

 

कंज़ुल उम्माल की पुस्तक अल अख़्लाक़ में रिवायत है के एक बार-बार नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने सैयदा फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा की कलाई में किसी प्रकार का गेहना देखा तो तबियत में नागवार (अप्रसन्न) हुआ तथा उन से फरमाया के तुम्हें अच्छा मालूम होता है के लोग कहें के मुहम्मद (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) की बेटी के हाथ में आग की ज़जीर है?  फिर सेवक से फरमाया के फलां क़बीले में वह ले जाओ, और उन के लिए तान्त का खुलादह तथा हाथी दाँत के कंगन ले आओ। 

 

ये रिवायत सिहाह सित्ता की पुस्तकों तथा मुसतदरक हाकिम में मरवी है के हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के घर में ना गुलाम था ना लौण्डी (दासी)।  हज़रत फातिमा ज़हरा अलैहस सलाम घर के पूर्ण काम अपने हाथ से किया करतीं।  यहाँ तक के चक्की पीसने से आप धन्य हाथों में छाले पड़ गए थे। 

 

एक बार नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के पास कई गुलाम एवं लौण्ड़ियाँ (दासी) आएँ।  हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने सैयदह को सुझाव दिया के अंत में वह सब तक़सीम होने वाले हैं यदि एक गुलाम या लौण्ड़ी हज़रत नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से माँग लो तो कामों में सुविधा हो जाएगी। 

 

अर्थात हज़रत फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा हज़रत नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के यहाँ गईं परन्तु बजाए इस के के हज़रत नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम लौण्डी या गुलाम प्रदान करते ये आदेश किया केः इस से श्रेष्ठतर मैं तुम्हें एक बात बताता हुँ वह ये है के हर नमाज़ के बाद और सोते समय तसबीह व तहलील व तहमीद किया करो। 

 

देखीए औरों के लिए तो वह पफ्याज़िया के कभी शब्द ला (नहीं) ज़बान पर आता ही नहीं यदि कुछ पास ना होता तो उधार ले ले कर निर्धन व ज़रूरतमंदों की अवश्यकता पूरी करते। 

 

और विशेष अपनी जिगर-गोशा बीबी फातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के साथ ये मामला के बावजूद गुलाम और लौण्ड़ियाँ उपलब्ध होने के ये तदबीर बलताई जा रही है के अल्लाह तआला को याद किया करो।  इस में क्या रहस्य था? 

 

 

{मक़ासिद उल इसलाम, जिल्द 05, पः 43-44}


submit

Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights reserved