ARTICLES

BOOKS

SHAYKH Ul ISLAM LIFE HOME ENGLISH URDU
 
 
Share |
List of Articles
  SI: 24   
शैतान की दुश्मनी  

  SI: 23   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 22   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 21   
कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है  

  SI: 20   
ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है  

  SI: 19   
धर्म के पूर्वजों का वज्द  

  SI: 18   
दोज़ख़ का हाल  

  SI: 17   
सुरह नास की तफसीर - अऔज़ का बयान  

  SI: 16   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी  

  SI: 15   
ईमानी हालत का उदाहरण  

Heading :
ईमानी हालत का उदाहरण

  ईमानी हालत का उदाहरण

 

ये बात रहस्य नहीं के यदि शाही आदेश किसी के हत्या के लिए शास्त्र हो तथा उस को मालूम भी हो जाए के मैं 2-3 दिन में हत्या किया जाने वाला हुँ तो उस के दिल कि क्या हालत होगी? 

 

उस के हरकतों व कर्म व कृत्य किस प्रकार होंगे।  अगरचे उस के घर में प्रत्येक प्रकार के ऐश व आराम के सामान हों तथा उच्च भोजन व आहार उस के सामने रखी जाएँ तथा उच्च व उत्तम वस्त्र पेश किए जाएँ तब भी उस का ध्यान किसी चीज़ की ओर ना होगा। 

 

इस का क्या कारण है?  छोटे से तामुल से मालूम हो सकता है के सम्पूर्ण आराम व ऐश, राहत व विश्राम का निर्भर होना दिल की फरहत पर है।  तथा जब दिल ही में उस की हत्या के विश्वास ने घेर कर लिया तो उस के दिल में फरहत को जगह ही कहाँ जिस से ऐश का आनन्द उठा सके। 

 

इस कारण से अल्लाह तआला फरमाता हैः- अल्लाह तआला फरहत वालों को दोस्त नहीं रखता।  क्यों के फरहत का होना बेख़ौफ़ी (बिना ख़ौफ़ व भय) है जिस से अजीब हरकतें होना अवश्य है। 

 

अतः जब मानव उपर्युक्त वर्णन हालत व तबियत खाने पीने तथा ऐश व विश्राम की ओर नाता ना करे तो उस पर ये आरोप लगाना बेमौक़ा होगा के उस ने रेहबानियत अपनाई है जो शरह शरीफ में लिखित है।  यदि इश को हदीस... सुनाई जाए तो वह मनुष्य रो रो कर कहेगा के हज़रत ये उचित है परन्तु दिल जो क़ाबू में नहीं उस का क्या उपाय व इलाज? 

 

इसी पर खियास कर लीजिए के जिस प्रकार शाही आदेश का विश्वास इस हालत तक पहुँचा देता है। 

 

इसी प्रकार जिस को अल्लाह तआला और रसल (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) के काम का विश्वास इस दर्जे का हो जो उपर्युक्त वर्णन व्यक्ति को है अवश्य व निश्चय इस को अमल पर मजबूर करेगा।  और यदि विश्वास ही ना हो तो ईमान सादिख नहीं आ सकता। 

 

 

{मक़ासिद उल इस्लाम, जिल्द 05, पः 22-23}


submit

Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights reserved