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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल
   
 

 नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

 

हज्जतुल वदाअ़ के अवसर पर सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने अपना मुबारक सर हलख करवाने के बाद हज़रत अबु तल्ह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को धन्य बाल बांटने का आदेश दिया। 

 

(सहीह मुसलिम, किताबुल हज्ज, हदीस संख्याः 3215) 

 

उपर्युक्त वर्णन के अतिरिक्त वुजू़ के समय जो मुबारक बाल या रेश मुबारक निकलते तथा सहाबा किराम रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम इन्हें हाथों में ले लेते तथा इस से बरकत प्राप्त करते। 

 

जैसा के सहीह बुखारी में वर्णन है के उ़रवह बिन मसऊ़द सखफी ने जब सहाबा किराम रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम के प्रेम व मुहब्बत की भावना को देखा, मुसलमानों के वातावरण तथा दरबार नबवी में सहाबा किराम के शिष्टाचार का दर्शन किया तो मक्का वापिस हो कर खुरैश के सामने इस प्रकार अपना प्रतिपुष्टि प्रकट कियाः

 

भाषांतरः- अए मेरी क़ौम!  अल्लाह का वचन मुहम्मद (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) जब नाक साफ करते हैं तो वो पानी उन में से किसी ना किसी के हाथ में गिरता, वह अपने चेहरे तथा शरीर पर मलते ततआ बरकत प्राप्त करते हैं।  यदि वह कोई आदेश करें तो वह लोग आदेश के समापन में आगे बड़ कर प्रथम करते हैं, जब वह वुज़ू करते हैं तो उन के साथी उन के वुज़ू का प्रयोग किया हुआ पानी प्राप्त करने के लिए इस प्रकार मचलते हैं जैसा के लड़ाई की नौबत आ जाएगी, जब वह वार्तालाप करते हैं तो सम्पूर्ण साथी अपनी आवाज़ कम कर लेते, उन के दिलों में आप का ऐसा सम्मान व आदर, इज्जत व सतीत्व इतना हैं के कोई व्यक्ति उन की ओर आँख भर कर नहीं देखता।  लोगो!  अल्लाह तआ़ला का वचन!  मैं ने राजाओं व बादशाहों का दरबार देखा, खैसर व कसरा की आन-बान देखी नजाशी राजा का गौरव व दबदबे देखा किन्तु अल्लाह का वचन!  मैं किसी राजा के दरबारियों को इस का ऐसा सम्मान व आदर करते हुए नहीं देखा जैसी मुहम्मद सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के साथी उन का आदर व सम्मान करते हैं।  आप ने समझौते का सुझाव रखा है उस को स्वीकार कर लो। 

 

(सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 2731)  

   
 
 
 
 
 
 
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