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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी
   
 

 पायजामे या तेबंद टखनों

से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

 भाषांतरः हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है उन्हों ने कहा के एक व्यक्ति अपने तेबंद को टखने से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ रहा था उस व्यक्ति को रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने (नमाज़ समाप्त करने के बाद) आदेश दिया के जाओ और वुज़ू कर लो (ये सुन कर) वह गया और वुज़ू कर के वापस आया।  और एक व्यक्ति ने पूछा के या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आप ने उस व्यक्ति को किस लिए वुज़ू का आदेश दिया है?  (हालांकि वह वुज़ू से था) सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया इस लिए के वह अपने तेहबद को टखने के नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ रहा था और अल्लाह तआला उस व्यक्ति की नमाज़ स्वीकार नहीं फरमाते जो अपने तेहबंद को टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ता है। 

 

(इस की रिवायत अबु दाउद ने की है।) 

 

स्पष्टीकरणः- (1)- मुल्ला अली खारी रहमतुल्लाहि अलैह ने कहा है के नमाज़ की स्थिति में हों या नमाज़ के बाहर हों प्रत्येक दोनों में सूरतों व परिस्थितियों में इमाम अबु हनीफा और इमाम शाफेअ रहीमुल्लाह के पास तेहबंद या पायजामे को टखनों से नीचे लटकाना मकरूह है और रद्दुल मुहतार में है के मरदों व पुरुषों के लिए ऐसे पायजामों का पहन्ना मकरूह है जिन के किनारे टखनों पर गिरते हों। 

 

(2)- इस हदीस में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेस कियाः (अल्लाह तआला) उस व्यक्ति की नमाज़ स्वीकार नहीं फरमाते जो अपने तेहबंद को टखनों से नीटे लटकाए हुए नमाज़ पढ़ता है।  

 

स्पष्ट हो के यहाँ टखनों के नीचे तेहबंद के लटकाने पर नमाज़ के स्वीकार ना होने का आदेश हुआ है और नमाज़ के सही व उचित ना होने का आदेश नहीं हुआ जिस से साबित है के नमाज़ टखनों से नीचे तेहबंद या पायजामे को रखने से नमाज़ मकरूह होती है और फासिद नहीं होती। 

 

अर्थात इमाम अबु हनीफा और इमाम शाफेअ रहीमउल्लाह ने तेहबंद या पायजामे को टखनों से नीचे रख कर नमाज़ संपादन करने पर नमाज़ की कराहत का आदेश लगाया है नमाज़ के फसाद का आदेश नहीं लगाया। 

 

इस हदीस में उस व्यक्ति को जो टखनों से नीचे तेहबंद लिटाए हुए नमाज़ संपादन कर रहा था सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने ये भी आदेश कियाः (जाओ और वुज़ू करलो) यहाँ सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उस व्यक्ति को इस के वुज़ू से होने के बावजूद फिर से वुज़ू करने का जो आदेश दिया है इस का एक उद्देश्य ये था के उस व्यक्ति ने तेहबंद को टखनों से नीचे रखे हुए जो नमाज़ संपादन की है उस का पाप क्षमा हो जाए इस लिए के वुज़ू से छोटे पाप व गुनाह क्षमा कर दिए जाते हैं। 

 

इस के अतिरिक्त उस व्यक्ति को फिर से वुज़ू करने का जो आदेश दिया गया है इस का दुसरा उद्देश्य ये था के उस व्यक्ति ने अपने तेहबंद को टखने से नीचे रख कर अपने बातिन में घमण्ड व ग़ुरूर की जो गंदगी व अपवित्रता पैदा करली थी वह इस फिर से वुज़ू करने से समाप्त हो जाए और इस प्रकार इस ज़ाहिरी तहारत से इस को बातिनी तहारत प्राप्त हो जाए के ज़ाहिर का बातिन पर प्रभाव व असर पड़ता है। 

 

(ये विषय मिरखात से व्याख्या है)।

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीह, जिल्द 03}

 

   
 
 
 
 
 
 
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