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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है
   
 

  ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है

 

सहाबा ने जब देखा के आप की राय ज़ाहिर रूप से निराली एवं पूर्ण मन के विरुद्ध तो होती है परन्तु ईमान की शक्ति के कारण से इस में सफलता भी हो जाती है।  इस लिए बिना चुँ-चरा के इस दफा स्वीकार कर लिया।  तथा किसी ने ये भी ना कहा के हज़रत प्रत्येक क़ौम व समुदाय के मुक़ाबले के लिए इस के अनुसार सामान करना बुद्धि के लिए शर्त है तथा अल्लाह तआला का जो आदेश हैः-

 

इस से भी इतनी शक्ति बहम पहुँचाने की अवश्यकता मालूम होती है के विरोधियों को हैबत हो, इस के विरुद्ध के हमारी वर्तमान स्थिति को देख कर वह हंसेंगे।  तथा कहेंगे के ये लोग भीख माँगनें को आ रहे हैं, इस बिना सामान व हथियार में इन दो सल्तनतों का मुक़ाबला करना अपने हाथ से अपने को तहेलके में ड़ालना है, जिस से अल्लाह तआला मना फरमाता है। 

 

फिर अल्लाह तआला ने हम लोगों पर रहम फरमा कर ये आसानी व सरलता की है के दो के मुक़ाबले में एक जाए अर्थात अल्लाह तआला फरमाता है फरमाता है, आप 100 से अधिक के मुक़ाबले में एक को भेजना चाहते थे, ये ना शरन जायज़ है ना बुद्धि से, तथा नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कसरा देश व खैसर के विजय होने का वादा जो फरमाया है वह सत्य है अवश्य इस का प्रकटन होगा, परन्तु ये नहीं फरमाया के जो प्रथम खलीफा होवही उन पर चढ़ाई करें।  चाहे उन के मुक़ाबले की शक्ति के योग्य हो या ना हो। 

 

अर्थात हज़रत सिद्दीख अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की ही बात चल गी।  जैसे बुद्धि के विरुद्ध विरोधियों के नज़रों में शरीअत के विरुद्ध भी थी।  आप के इस अमली आदेश से ऑलिया अल्लाह ने ये अभ्यास प्राप्त किया के जिहाद नफ्स में भी जैसे कुछ कार्य व कर्म ज़वाहिरे-नुसूस के विरुद्ध आते हैं। 

 

परन्तु क्यों के विशेष नियत मअरिफत व अल्लाह तआली की तक़रीब की होती है, इश लिए उम्मीद है के अल्लाह तआला अपनी कृपा व करम से क्षमा कर दे। 

 

 

{मक़ासिद उल इस्लाम, जिल्द 10, पः 16-17}

   
 
 
 
 
 
 
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