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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने हज़रत जिब्रील अलैहिस सलाम को देखा
   
 

 सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु

ने हज़रत जिब्रील अलैहिस सलाम को देखा

 

 

सैयदना अ़मीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने इ़मान की स्थिति में हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का चहरे अनवर देख कर सहाबियत का विशाल स्तर प्राप्त किया तथा इसी सत्य के पैगम्बर सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की सेवा में एक विनती किया के वह अल्लाह की वही के मुखिया हज़रत जिब्रील अलैहिस सलाम की सच्ची सूरत में देखना चाहते हैं। 

 

सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम नमाज़ इस विनती को स्वीकार किया।  जब जिब्रील अमीन बारगाह नबवी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम में उपस्थित हुए तो सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से कहा के ऊपर देखा- सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने जब नेत्र उठाई तो कया देखते हैं के सामने हज़रत जिब्रील अमीन अलैहिस सलाम हैं।  अर्थात इ़माम बैहखी रहमतुल्लाहि अलैह ने दलाइल उन नबूवह में रिवायत व्याख्या करते हैः-

 

भाषांतरः- हज़रत अ़म्मार बिन अबु अ़म्मार रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है के हज़रत हमज़ा बिन अबदुल मुत्तलिब रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने निवेदन कियाः या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम! मुझे जिब्रील अमीन अलैहिस सलाम का इन की सत्य स्थिति व शकल में दीदार करवाइए।  तो आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) ने आदेश कियाः आप इन्हें सत्य स्थिति में नहीं देख सकते।  इन्हों ने निवेदन कियाः अवश्य मैं नहीं देख सकता, किन्तु आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) मुझे दिखाइए।  आप ने आदेश दियाः बैठ जाओ।  जब वह बैठ गए, तो हज़रत जिब्रील अमीन रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु कअ़बे की इस लकडी पर उतर आए जिस पर मुशरिकीन तवाफ के समय अपने कपडे डाला करते, फिर हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः अपने नेत्र उठाओ और देखो।  इन्हों ने अपनी आंखें उठाई तथा हज़रत जिब्रील अमीन अलैहिस सलाम के दोनों खदमों को देखा जो ज़मरूद के प्रकार हरीभीर खेती की तरह दिखाई दे रहे थे।  तो (कसरत अनवार के कारण) से आप पर बेखुदी तारी हो गई। 

 

(दलाइल उन नबूवह लिल बैहखी, हदीस संख्याः 3010)

   
 
 
 
 
 
 
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