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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  उहुद का युद्ध
   
 

 उहुद का युद्ध

 

उहुद का युद्ध 3 हिज्री में हुआ।  उहुद मदीने के एक विसाल पर्वत का नाम है, जि के संबंधित सत्य नबी सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः-

 

यह (उहुद) वह पर्वत है जो हम से मुहब्बत व प्रेम करता है तथा हम इस से मुहब्बत करते हैं। 

 

(सहीह अल बुखारी, हदीस संख्याः 4083) 

 

यह सत्य व असत्यता का युद्ध इसी पहाड के दामन में हुआ।  इस युद्ध में मुसलमानों के सत्य के कारवाँ की संख्या 700 थी, जिस में केवल 100 सहाबा किराम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुम शस्त्र-सज्जित व शस्त्रधारी थे, तथा खुरैश की सेना 3000 लोगों की थी।  जिन में 700 शस्त्र-सज्जित व शस्त्रधारी थे। 

 

 

सत्य व वास्तविकता के मार्ग में शहादत पाने वाले सहाबा किराम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुम की संख्या 70 थी।  जब के अधर्म व असत्यता के 30 सदस्य नरक व जहन्नम गए।

   
 
 
 
 
 
 
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