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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  शहीदों के सरदार - सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की विशाल शहादत
   
 

 शहीदों के सरदार -

सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की विशाल शहादत

 

उहुद के युद्ध में सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु अपनी सम्पूर्ण वीरता व शूरता के साथ मक्के वालों का सामना करते रहे।  हिन्द बिन्त उ़खबा के वहशी नाम के एक हबशी गुलाम जो तीरंदाज़ी में विशेज्ञ थे तथा वह दोनों इस समय तक इसलाम से अभूषण नहीं हुए थे। 

 

अर्थात इन से हिन्दह ने कहाः यदि तुम युद्ध में अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को शहीद करदो तो तुम्हें आजाद कर दिया जाएगा।  वह सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु को लगातार निशाना ढ़ाल रहे थे तथा मौक़े की तलाश में थे के जैसा ही मौक़ा मिले सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु पर निशाना लगाएंगे। 

 

वह एक स्थान पर छिप कर बैठ गए, जब सैयदा अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु सामना करते हुए इन के खरीब से गुज़रे तो इन्हों ने छिप कर आप रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु पर एक तीर से वार किया जो सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के नाफ मुबारक से हो कर पीठ से निकल गया।  तथा आप (रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु) की शहादत हो गई। 

 

फिर हन्दह ने सैयदना अमीर हमज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु की लाश मुबारक का अनादर किया और आप के पेठ मुबारक चीर कर के इस से जिगर को निकाला और चबा कर चाबा किन्तु वह निगल ना सकी। 

 

स्पष्ट रहे के बाद में हज़रत वहशी एवं हज़रत हिन्दह दोनों को इसलाम के वरदान से आभूषण हो गए, रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुमा।  जिस समय आप की शहादत हुई इस समय आप की उम्र मुबारक 54 वर्ष थी।  जैसा के इ़माम हाकिम मुसतदरक में रिवायत करते हैं। 

 

(अल मुसतदरक अला सहिहैन लिल हाकिम, हदीस संख्याः 4880)

   
 
 
 
 
 
 
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