Advanced Search
اردو
English
 
 
 
  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
> Back
संवाद सविस्तार
   
  उहुद के शहीदों की प्रतिष्ठा
   
 

 उहुद के शहीदों की प्रतिष्ठा

 

उहुद के युद्ध में शहीद होने वाले सहाबा किराम रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हुम की विशेष जीवन से संबंधित सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमाया के अल्लाह तआ़ला ने इन्हें जन्नत में उच्च स्थान व दर्जा दान फरमाया है। 

 

तथा वह अल्लाह तआ़ला की प्रदान किए हुए वरदानों से लाभ उठा रहे हैं जैसा के मुसनद इ़माम अहमद में हदीस शरीफ हैः-

 

भाषांतरः- सैयदना अबदुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, इन्हों ने फरमाया, हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः जब उहुद में तुम्हारे भाई शहीद हो गए तो अल्लाह तआ़ला ने इन की आत्माओं को हरे पक्षियों के पेट में रखा, वह लोग सेराबी (भोजन के लिए) के लिए जन्नत की नदियों पर आते हैं।  वह जन्नत के फल खातें हैं तथा अ़र्श के साये में सोने के कंदीलों (दीपक) में विश्राम करते हैं।  जब वह अपने खाने तथा मशरूबात की सुगन्ध को पाय तथा अपने सर्वश्रेष्ठ ठिकाने को देखेतो कहने लगेः ऐ काश!  हमारे भाई भी जान लेते के अल्लाह तआ़ला ने हमारे लिए कया-कया नेअ़मतें व वरदान रखी, ताके वह जिहाद से दूर ना रहें तथा युद्धभूमि व रणभूमि से पीठे ना हंटे।  तो अल्लाह तआ़ला ने आदेश फरमायाः तुम्हीर ओर से यह खुशी के समाचार मैं इन तक पुंचाता हुं, फिर अल्लाह तआ़ला ने अपने रसूल सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम पर यह आयत करीमा प्रकट कीः और जो लोग अल्लाह तआ़ला के मार्ग में शहीद किए गए इन्हें कभी मुर्दा ना समझना बल्कि वे अपने रब के पास जीवन हैं, रोज़ी पा रहे हैं।  (सुरह आले इ़मरानः 03:169) 

 

(मुसनद अ़ल इ़माम अहमद, मुसनद अबदुल्लाह बिन अल अब्बास, हदीस संख्याः 2430)

   
 
 
 
 
 
 
Mail to Us    |    Naqshbandi Calendar    |    Photo Gallery    |    Tell your friends   |    Contact us
Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights Reserved