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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  उहुद के शहीदों की ज़ियारत पर सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम एवं चारो खुलेफा का अमल
   
 

 उहुद के शहीदों की ज़ियारत पर सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम एवं चारो खुलेफा का अमल

 

सरकार नबी करीम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का यह मुबारक स्वभाव था के आप हर वर्ष प्रबंध के साथ उहुद के शहीदों की ज़ियारत (मुलाकात व प्रादुर्भाव) के लिए तशरीफ लेजाया करते तथा हुज़ूर पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के बाद आप का पालन में सैयदना सिद्दीख अकबर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु, सैयदना फारूख आज़म रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु तथा सयैदना उसमान ग़नी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु अपने-अपने खिलाफत के दौर में प्रत्येक वर्ष पाबंदी के साथ उहुद के शहीदों की ज़ियारत के लिए तशरीफ ले जाया करते थे। 

 

सैयदना अ़ली मुरतज़ा रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु के खिलाफत के दौर में क्यों के आप ने कूफा को खिलाफत का स्थान बनाया था, इसी लिए आप का निवास कूपा में था।  अर्थात आप के बारे में इस आदत का वर्णन ना मिलने के कारण से गलत फेहमी में व्यस्त नहीं होना चाहिए। 

 

जैसा के तफसीर रूह अल मअ़ना, तफसीर खुरतुबी, तफसीर दुर्रे मन्सूर तथा तफसीर इ़ब्न कसीर आदि में रिवायत हैः-

 

भाषांतरः- हज़रत इ़ब्न जरीद रहमतुल्लाहि अलैह ने हज़रत मुहम्मद बिन इब्राहीम रहमतुल्लाहि अलैह से वर्णित व्याख्या किया है, आपने फरमायाः हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम प्रत्येक वर्ष के प्रारम्भ में उहुद के शहीदों की ज़ियारत के लिए तशरीफ लाते तथा फरमातेः

 

सलामती हो तुम पर क्योंके तुम ने धीरज व सब्र किया, तो कया ही अच्छा परलोक व आखिरत का घर है तथा इसी प्रकार प्रत्येक वर्ष हज़रत अबु बक्र सिद्दीख रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु, हज़रत उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु तथा हज़रत उसमान ग़नी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु भी ज़ियारत किया करते। 

 

(तफसीर अल खुरतूबी, जिल्द 9, पः 312 / रूह उल मआ़नी फी तफसीर उल क़ुरान / अल दर्रु मन्सूर फी अत तवाइल / तफसीर इ़ब्न कसीर / अल सीरह अल नबूवह ला बिन कसीर, जिल्द 3, पः 90 / मग़ाज़ी अल वाखदी, दफन शुहदा उहुद, जिल्द 1, पः 311)

   
 
 
 
 
 
 
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