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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  धर्म पर निष्ठा रहने वाले लोक परलोक में धन्य
   
 

 धर्म पर निष्ठा रहने वाले लोक परलोक में धन्य

 

रमज़ान मुबारक हो या अन्य महिने, हर परिस्थिति में शरीअ़त पर दृढ़ता अवश्य है तथा धर्म पर दृढ़ता व निष्ठा ही सफलता है।  अल्लाह तआ़ला ने अपने कलाम मजीद में इन बन्दों को सराहा है जो अपने विश्वास व कर्म में अटल व स्थिर रहते हैं।  जैसा के निम्नलिखित आयत मुबारक में आदेश हैः-

 

भाषांतरः- जिन लोगों ने कहा कि हमारा रब अल्लाह है।  फिर इस पर दृढ़तापूर्वक जमे रहे, उनपर फ़रिश्ते उतरते है कि न डरो तथा न शोकाकुल हो, तथा उस जन्नत की शुभ सूचना लो जिसका तुमसे वादा किया गया है। 

 

 

(सुरह हा. मीम. सजदा 41:30) 

 

एक मोमिन बन्दे में अपने विश्वास व कर्म पर निष्ठा जीवन भर तक रहनी चाहिए।  मरते दम तक वह इसलाम के अहकाम पर दृढ़ता पूर्वक रहे तथा अपने अच्छे कर्म पर पाबंदी करें।  तभी वह दुनिया व आखिरत (लोक परलोक) में अनुमन्त्रित व भाग्य का अधिकारी होगा।  अल्लाह तआ़ला फरमाता हैः-

 

भाषांतरः- ऐ ईमानवालो!  अल्लाह का डर रखो, जैसा की उसका डर रखने का हक़ है।  तथा तुम्हारी मृत्यु बस इस दशा में आए कि तुम मुस्लिम (आज्ञाकारी) हो। 

 

(सुरह आले इ़मरान 03:102) 

 

जो लोग अल्लाह तआ़ला का आज्ञापालन में व्यस्त रहते हैं।  दिन रात इस कि नाफर्मानी व आज्ञालंघन से अवरोध करते हैं।  रात दिन इस कि इ़बादत व बन्दगी किया करते हैं।  इसी कि हम्द व सना (प्रशंसा व गुणगान) तथा याद में अपना गुज़ारा करते हैं। 

 

अल्लाह तआ़ला कि सन्तुष्टी व प्रसन्नता के लिए रात भर इ़बादत करते हैं।  तथा व्यापार व कारोबार इन्हें अल्लाह के ज़िक्र से नहीं रोकते।  ऐसे बन्दों को क़यामत के दिन सम्माननीय स्थान दिया जाएगा।  जिस दिन हर व्यक्ति अल्लाह कि बारगाह में खौफ व भय, बेचैनी व चिन्ती के साथ उपस्थित होगा।  उस दिन इन्हें अमन व शान्ति, राहत व रहमत से संबोधित कर उन कि शान प्रकट की जाएगी। 

 

 

मुसतदरक अ़ला सहिहैन में हदीस पाक हैः-

 

भाषांतरः- ऐ इ़मानवालो अल्लाह से डरो जिस प्रकार इस से डरने का हक़ है तथा इसलाम कि स्थिति पर ही संसार से विदा हो जाओ।  सैयदना उ़खबा बिन आ़मिर जहनी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वर्णित है, उन्हों ने फरमायाः हम हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के साथ एक यात्रा में थे तो हम बारी-बारी से ऊँटों को चराने कि ज़िम्मेदारी लेते थे.  जब मेरी बारी आई तो मैं ने अपने ऊँटों को चर ने के लिए बेजा।  फिर वापस हो कर हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम कि पावन सेवा में उपस्थित हुआ।  जबके आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) सहाबा किराम के बीच खुत्बा आदेश फरमा रहे थे।  तो मैं ने आप (सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम) को यह आदेश फरमाते हुए सुनाः लोगों को एक ऐसे मैदान में जमा किया जाएगा के नेत्र उन को पालेगी।  दाई़ उन को अपनी आवाज़ सुनाएगा।  एक सूचना देने वाला सूचना देगाः- अवश्य सम्पूर्ण झुण्ड जान लेगा के आज बढाई किस के लिए है।  यह सूचना 3 बार होगी।  फिर सूचना देने वाला कहेगाः वह लोग कहां हैं जिन को पहलू --- से अलग हो जाया करते थे?  फिर कहेगाः-

 

वह लोग कहाँ हैं जिन्हें अल्लाह के ज़िक्र से, नमाज़ संपादन करने तथा ज़कात समापन करने से ना व्यापार अज्ञात करती थी तथा ना लेन-देन, वह इस दिन से डरते थे जिस में दिल तथा निगाहें होंगी।  फिर सूचना देने वाला सूचना देगाः अवश्य सम्पूर्ण लोग जान लेंगे के आज बढाईकिस के लिए है।  फिर कहेगाः खूब हम्द (प्रशंसा व गुणगान) करने वाले कहाँ है जो अपने रब कि हम्द व सना (प्रशंसा व गुणगान) सुना करते थे।  यह सहीह हदीस है। 

 

 

(अल मुसतदरक अ़ला सहिहैन, तफसीर सुरह अल नूर, हदीस संख्याः 3467) 

 

निष्ठा व दृढ़ता के बारे में अल्लामा इ़समाईल हख्खी रहमतुल्लाहि अलैह ने रूह उल बयान में लिखा हैः-

 

भाषांतरः- शेक़ अबु तालिब रहमतुल्लाहि अलैह ने फरमाया कामकाज को पाबंदी संपादन देना इ़मान वालों के शिष्टाचार से है तथा इ़बादत गुज़ारों का तरीक़ा है अधिक यह इ़मान में अधिकता का कारण के लक्षण है। 

 

(तफसीर रूह अल बयान, सुरह आले इ़मरान -112)

   
 
 
 
 
 
 
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