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  NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 383   
हसद के विनाश-

  NS1: 467   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है-

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

 
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संवाद सविस्तार
   
  रमज़ान का महिना समाप्त हुआ, अल्लाह का फैज़ान नहीं!
   
 

 रमज़ान का महिना समाप्त हुआ, अल्लाह का फैज़ान नहीं!

 

याद रखें के हम ने रमज़ान के महिने को तो विदा किया है परन्तु इस के फैज़ान को विदा नहीं किया।  क़ुरान कि तिलावत को विदा नहीं किया।  अच्छे कर्म को विदा नहीं किया, जिस प्रकार हम रमज़ान मुबारक में अच्छे कर्म संपादन करते थे, इस सिलसिले को रमज़ान के बाद भी जारी रखें। 

 

 

इस महिने में हमारा हर कदम (कार्यवाही) नेकी तथा भलाई कि ओर उठा करता था, धीरज व सहनशीलता (सब्र व धेर्य) व धन्यवाद व शुक्र हमारा पेशा बन चुका था।  यह रफतार व चरित्र रमज़ान के महिने के बाद भी बाखी रहे। 

 

रमज़ान के महिने में हमारा हर कर्म पावन शरीअ़त कि रोशनी में हुआ करता था।  रमज़ान मुबारक के गुज़रने के बाद इस पालन में ग़फलत व अज्ञानता ना होने पाय।  इ़मान वालों का यह आदर्श व वर्ग के वह अल्लाह के अहकाम से करें। 

 

रमज़ान के रोज़ेदारों का यह तरीक़ा नहीं के वह इस महिने के गुज़र जाने के बाद इरशाद नबवी से दूरी प्राप्त करें।  क्यों के शरीअ़त तो इ़मानवालों पर हर परिस्थिति में अनिवार्य है।

   
 
 
 
 
 
 
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