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बीवी अपने पति को और एक मनुष्य दुसरे मनुष्य को जीवन में और ना मरने के बाद क़ब्र को सजदा करे

  बीवी अपने पति को और एक मनुष्य दुसरे मनुष्य

को जीवन में और ना मरने के बाद क़ब्र को सजदा करे

 

भाषांतरः हज़रत ख़ैस बिन सअद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है वे फरमाते हैं के मैं (जब) हैरह (जो कूफा के खरीब एक प्राचीन नगर था) आया तो वहाँ के लोगों को देखा के अपने सरदार को सजदा कर रहे हैं।  (ये देख कर अपने दिल में) मैं ने कहा के निश्चय रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस बात के अधिक योग्य हैं के आप को सजदा किया जाए।  फिर मैं (जब मदीने पाक वापस हुआ तो) रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की सेवा में उपस्थित हो कर निवेदन किया के मैं शहर हैरह गया था तो वहाँ के लोगों को देखा के वे अपने सरदार को सजदा करते हैं हालाँकि आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) ज्यादा अधिकारी हैं के आप को सजदा किया जाए (इस लिए के आप (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) निर्माण में सब से अधिक बुज़ुर्ग और मौजुदात में सब से अधिक माननीय हैं ये सुन कर) आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया बताओ के (मेरे देहान्त के बाद) यदि तुम मेरी क़ब्र से गुज़रो तो क्या मेरी क़ब्र को (या क़ब्र वाले को) सजदा करोगे तो मैं ने निवेदन किया के नहीं (मैं सजदा नहीं करुँगा) आप ने फरमाया के तुम (मेरे जीवन में और मेरे बाद मेरी क़ब्र को) सजदा ना करो (फिर आप ने फरमाया) के यदि किसी को सजदा करने का आदेश देता तो महिलाओं को आदेश देता के वह अपने पतियों को सजदा करें क्यों के अल्लाह तआला ने पुरुषों का अधिकार महिलाओं पर अधिक रखा है। 

 

(इस की रिवायत अबु दाउद ने की है और इमाम अहमद ने इस की रिवायत मआज़ बिन जबल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से की है)

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीहजिल्द 08}

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