List of Articles  
 
  MD: 141   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  MD: 140   
पति यदि बीवी को अति कठिन काम का भी आदेश दे तो वह इस को संपादन करे

  MD: 139   
बीवी अपने पति को और एक मनुष्य दुसरे मनुष्य को जीवन में और ना मरने के बाद क़ब्र को सजदा करे

  MD: 138   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  MD: 137   
बीवी के लिए अल्लाह के बाद आज्ञापालन में पति का दर्जा है

  MD: 136   
सर्वश्रेष्ठ महिला के गुण व लक्षण

  MD: 135   
पति की संतुष्टि पत्नी के जन्नत में दाखिल होने का कारण

  MD: 134   
नारी को जन्नत में प्रवेश करने वाले कर्म

  MD: 133   
किसी की ओर झूठ बाँधने की मज़म्मत

  MD: 132   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

 

Share |
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

 क़ुरान में नमाज़ का आदेश

 

(1)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः भाषांतरः और उन लोगों को (पिर्व किताबों में) यही आदेश हुआ था के केवल अल्लाह ही की बन्दगी की नीयत से एकसो हो कर उस की इबादत करें। 

(सुरह अल बैयिनहः 98:05) 

 

स्पष्टीकरणः- इस आयत से मालूम होता है के इबादत निपुण खुलूस के साथ अल्लाह तआला के लिए अमल करने को केहते हैं और खुलूस का नीयत पर निर्भर है क्यों के नमाज़ भी इबादत है इस कारण से इस को खुलूस नीयत से संपादन करना चाहिए।  यही कारण है नमाज़ के लिए नीयत शर्त है।  (तअल्लुक़ अला अस सुनन)

 

(2)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः और अपने रब की बढ़ाईयाँ बयान करो। 

(सुरह अल मुद्दस्सिरः 74:02) 

 

(3)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः और अपने रब का नाम लेकर नमाज़ पढ़ता रहा। 

(सुरह अल आलाः 87:15) 

 

(4)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः जितना क़ुरान आसानी से पढ़ा जाए पढ़ लिया करो। 

 

(सुरह अल मुज़्ज़म्मिलः 73:20) 

 

स्पष्टीकरण: इस आयत से मुतलक़ क़िरात की फरज़ियत साबित होती है। 

 

(6)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः

भाषांतरः ये क़ुरान साफ फसीह अरबी भाषा में है जिस का वर्णन पूर्व (उम्मतियों की) आसमानी किताबों में भी है। 

 

(सुरह शुअराः 26:195) 

 

स्पष्टीकरणः इस आयत से मालूम होता है के क़िरात अरबी भाषा में ही होना चाहिए यदि इस का भाषांतर पढ़ा जाए तो इस का क़ुरान पर इतलाक़ ना होगा तथा नमाज़ अदा ना होगी। 

 

(7)- और फरमाया रुकू करो। 

 

स्पष्टीकरणः इस आयत से रुकू की फरज़ियत साबित होती है। 

 

(8)- और अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः और अपने हाथों को रोके रहो और नमाज़ की पाबंदी रखो। 

(सुरह अन निसाः 04:77) 

 

{उद्धरणः नूरुल मसाबीह, जिल्द 02}

submit

Copyright 2008 - Ziaislamic.com All Rights Reserved