NS1: 528   
तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

  NS1: 527   
नबी करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मधुर बाल

  NS1: 526   
नूरे-मुसतफा सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की उत्पत्ति

  NS1: 525   
क़ुरान में नमाज़ का आदेश

  NS1: 524   
पायजामे या तेबंद टखनों से नीचे लिटाए हुए नमाज़ पढ़ने की वईद व चेतावनी

  NS1: 523   
हज़रत सफवान की पत्नी की हुज़ूर की सेवा में अपने पति की शिकायत और इस पर हुज़ूर का निर्णय

  NS1: 522   
पैगम्बर - निर्माण के मार्ग-दर्शक

  NS1: 521   
पसंदीदा फक़्र व गरीबी

  NS1: 520   
कामिल मुरशिद की तलाश अत्यन्त अवश्य है

  NS1: 519   
ईमान की शक्ति से क़ौम जीवित रेहती है

 
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तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

 तहयतुल मसजिद पढ़ने की दुसरी कैफियत

 

भाषांतरः हज़रत अबु ज़र रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है उन्हों ने कहा के मैं मसजिद में प्रवेश हुआ तो क्या देखता हुँ के रसूल करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तन्हा तशरीफ फरमा हैं तो मैं सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की धन्य सेवा में जा बैठा तो नबी पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया मसजिद में (आने वाले के लिए) तहयतुल मसजिद (मुसतहब) है और तहयतुल मसजिद 2 रकात हैं उटा अबु ज़र (रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और 2 रकात संपादन कर लो अबु ज़र रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने कहा के मैं उठा और 2 रकात तहयतुल मसजिद संपादन किया। 

 

(इस की रिवायत इब्न हिब्बान ने की है और कहा है के ये हदीस सहीह है)

 

 
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