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f:2190 -    मसजिद खुबा में 2 रकात नमाज़ पढ़ना उ़मरे के बराबर
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Question:     मसजिद खुबा में 2 रकात नमाज़ पढ़ना उ़मरे के बराबर
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Answer:     3 मसजिदें- मसजिद हराम, मसजिद नबवी तथा मसजिद अखसा के बाद मसजिद खुबा सम्पूर्ण मसजिदों से श्रेष्ठतर है।  मदीने में सब से पूर्व सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम यहीं नमाज़ संपादन फरमाया करते थे यहाँ का एक दोगाना एक उ़मरा के बराबर है।  सुनन इ़ब्न माजह शरीफ में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सुहैल बिन हनीफ रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु ने फरमायाः सरकार सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः जो अपनी निवास स्थान से तहारत के साथ मसजिद खुबा आए तथा दो रकात नमाज़ संपादन करे इसे उ़मरे का सवाब व पुण्य है।  

(सुनन इ़ब्न माजह, हदीस संख्याः 1477 / जामअ़ अल हादीस, हदीस संख्याः 21785 / अल जामअ़ अल कबीर लिल सुयूती, हदीस संख्याः 4516 / कंज़ुल उ़म्माल, हदीस संख्याः 34963)  

अधिक जामअ़ तिरमिज़ी, सुनन इ़ब्न माजह, मुअ़जम कबीर तबरानी, सुअ़बुल इ़मान और मुसनद अबु यआ़ला आदि में हदीस पाक है, सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः मसजिद खुबा में नमाज़ संपादन करना, उ़मरा संपादन करने के प्रकार है।  

(जामअ़ तिरमिज़ी, हदीस संख्याः 325 / सुनन इ़ब्न माजह, हदीस संख्याः 1476 / अल मुअ़जम अल कबीर, हदीस संख्याः 569 / शुअ़बुल इ़मान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 4031 / मुसनद अबी यआ़ला अल मुसिली, हदीस संख्याः 7015 / अस सुनन सुग़रा लिल बैहखी, 1824 / जामअ़ अल हादीस, हदीस संख्याः 13639 / अल जामअ़ अल कबीर लिल सुयूती, हदीस संख्याः 119 / अस सुनन अल कबीर लिल बैहखी, हदीस संख्याः 10594 / कंज़ुल उ़म्माल फी सुनन, हदीस संख्याः 3496)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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