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f:2176 -    क़ुरबानी के समय पढ़ी जाने वाली दुआएँ
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Question:     क़ुरबानी के समय पढ़ी जाने वाली दुआएँ क्या हैं?
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Answer:     बिसमिल्लाही अल्लाहु अकबर कह कर जानवर ज़िबा करें तथा कोई भी मासूर (निर्धारित) दुआ पढ़े।  

दुआ से संबंधित मुअजम तबरानी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है के हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम सफेद व काले रंग वाले 2 दुंबे ज़िबा करते, जब सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ज़िबा करने का उद्देश्य करते तो अपना धन्य क़दम जानवर के पहलू पर रखते तथा ये दुआ करतेः बिसमिल्लाही अल्लाहुम्मा मिनका वा लका अल्लाहुम्मा तक़ब्बल मिन मुहम्मद
भाषांतरः अल्लाह तआला के नाम से, अए अल्लाह ये तेरी ही प्रदान है तथा तेरे दरबार में क़ुरबानी है अए अल्लाह!  ये मुहम्मद (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) की ओर से है इसे स्वीकार कर।  

(मुअजम कबीर तबरानी, हदीस संख्याः 11166)  

उपर्युक्त वर्णन दुआ के अंत में मिन मुहम्मद के बजाए मिन्नी कहें।  

जैसा के सुनन अबु दाउद में हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से ये दुआ व्याख्या हैः-

लिप्यंतरणः- इन्नी वज्जहतू वजहिया लिल्लज़ी फतरस समावाती वल अरज़ा अला मिल्लती इबराहीमा हनीफौं वमा अना मिनल मुशरिकीन।  इन्नी सलाती वानुसुकी वामहयाया वा ममाती लिल्लाही रब्बिल आलामीन।  ला शरीका लहु वाबिज़ालिका उमिरतू वा अना मिन अल मुसलिमीन।  अल्लाहुम्मा मिनका वा लका अन मुहम्मदिन वा उम्मातिही बिसमिल्लाही वल्लाहु अकबर।  

भाषांतरः निश्चय मैं ने मिल्लत इबराहीम अलैहिस सलाम पर स्थापित रह कर सम्पूर्ण अदयान (धर्मों व मज़हबों) से मुँह मोड़ कर अपना पक्ष एकसुई से उस ज़ात की ओर फेर लिया है जिस ने आसमानों तथा ज़मीनों को बेमिसाल पैदा किया है तथा मैं मुशरिकों में से नहीं हुँ, निश्चय मेरी नमाज़, मेरा हज्ज, मेरी क़ुरबानी, मेरा जीवन तथा मेरी मृत्यु अल्लाह तआला के लिए है जो सम्पूर्ण जहानों का पालनहार है।  इस का कोई शरीक नहीं तथा इसी का मुझे आदेश दिया गया है तथा मैं सारी मखलूक़ (निर्माण) में सब से पहला मुसलमान हुँ।  अए अल्लाह ये तेरी ही अता (प्रदान) है तथा तेरे दरबार में क़ुरबानी है, अए अल्लाह!  मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ओर से तथा आप की उम्मत की ओर से स्वीकार कर, अल्लाह तआला के नाम से, अल्लाह बहुत बड़ा है।  

(सुनन अबु दाऊद, हदीस संख्याः 2797)  

उपर्युक्त वर्णन दुआ के अंत में अन मुहम्मदिन वा उम्मतिही के बजाए अन्नी कहें।  

हाशिया अस सिन्दी अला सुनन इब्न माजह में क़ुरबानी की ये दुआ लिखित हैः-

लिप्यंतरणः- तक़ब्बल मिन्नी कमा तक़ब्बलता मिन इबराहीमा ख़लीलिका वा मुहम्मदिन नबियिक
भाषांतरः अए अल्लाह!  मेरी क़ुरबानी स्वीकार कर जिस प्रकार तू ने अपने ख़लील हज़रत इबराहीम अलैहिस सलाम तथा अपने महबूब नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से स्वीकार किया।  

(हाशिया अस सिन्दी अला सुनन इब्न माजह)  

अधिक ये दुआ भी पढ़ी जाती हैः-

लिप्यंतरणः- अल्लाहुम्मा तक़ब्बल हाज़िहिल उज़हियता मिन्नी कमा तक़ब्बलता मिन इबराहीमा ख़लीलिका वामिन मुहम्मदिन नबियिका वा हबीबिका अलैहिमस सलातु वस सलाम।  

भाषांतरः अए अल्लाह!  मेरी इस क़ुरबानी को स्वीकार कर जिस प्रकार तूने अपने ख़लील हज़रत इबराहीम अलैहिस सलाम तथा अपने नबी व हबीब हज़रत सैयदना मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से स्वीकार किया।  

यदि क़ुरबानी वाले के अतिरिक्त कोई और व्यक्ति ज़िबा कर रहा हो तो वर्णन दुआओं में तक़ब्बल मिन्नी में मिन्नी के बजाए मिन कह कर क़ुरबानी करने वाले का तथा इन के पिता का नाम लें तथा इस प्रकार कहें तक़ब्बल मिन फलाँ बिन फलेँ। इसी प्रकार अन्नी के बजाए अन कह कर क़ुरबानी करने वाले का तथा इन के पिता का नाम लें।

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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