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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण

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f:2122 -    टखनो के नीचे पायजामा पहन्ना?
Country : हैद्राबाद,
Name : अ़ली
Question:     क्या नमाज़ के समय पैंट को मोड़ कर करने से नमाज़ मकरूह या फासिद हो जाती है?
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Answer:     नमाज़ में कमाल व उच्च दर्जे की आजिज़ी (विनम्रता) होनी चाहिए।  इस लिए नमाज़ की स्थिति में टखनों के नीचे कपड़ों व वस्त्र को लटकाए रखना अत्यन्त दर्जे कराहत में होगा तथा कपड़ों को मोड़ कर नमाज़ में होगा तथा कपड़ों को मोड़ कर नमाज़ पढ़ने से भी हदीसों में मना किया गया।  

सहीह बुखारी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः मुझ को आदेश फरमाया गया के मैं साथ (7) भाग पर सजदा करुँ तथा ये के नमाज़ में ना बालों के समेटुँ एवं ना कपड़ों को।  

जैसा के दुर्रे मुक़तार, जिल्द 01, पः 473 में उल्लेख हैः-

इस के प्रति रद्दुल मुहतार में हैः

अतः ये है के नमाज़ में कपड़ों को चढ़ाना या समेटना मकरूह तहरीमी है।  इसी लिए कुछ अरबाबे-फतवा ने फरमाया के टखनों के नीचे कपड़े व वस्त्र पहने हों तो नमाज़ के समय नीच से मोड़ना या ऊपर से टोबना प्रत्येक दोनों मकरूह है तथा कुछ अन्य अरबाबे-फतवा ने फरमाया के टखनों के नीचे पहन्ने की निषिद्ध के साथ हदीसों में कठिन चेतावनियाँ वर्णन की गई।  

इसी लिए चेतावनी से टखनों के लिए यदि वस्त्र व कपड़े नीचे से मोड़ लिए जाएँ तो अत्यन्त दर्जा कराहत में नहीं।  

किन्तु प्रत्येक स्थिति में कपड़ों को आरम्भ ही से ऐसे सलवाएँ के वह टखनों के ऊपर रहें, सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की धन्य सुन्नतों पर अमल करने ही में दारैन (दीन व दुनिया) की बरकतें हैं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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