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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2029 -    स्मगलिंग व तस्करी (Smuggling) के द्वारा सामान उत्पादन करना
Country : यू ऐ ई,
Name : साजिद खान
Question:     मुफती साहब! एक देश से दूसरे देश यात्रा करने वाले सदस्य स्मगलिंग व तस्करी के द्वारा कुछ चीज़ें साथ लाते हैं ताकि कस्टम ना लगे, शरीअत में इस का क्या आदेश है? हालांकि इन में से कुछ चीज़ों का उपयोग करना इसलाम में जायज़ होता है।
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Answer:     इसलामी शरीअत ने प्रत्येक व्यक्ति को इस बात का अधिकार दिया है के वे जायज़ वस्तु व चीज़ों का लेन-देन करे तथा अपनी अवश्यकता के अनुसार उसे बदला करे, वर्तमान काल अनेक देशों से अपनी अर्थनीति व गार्हस्थ्य प्रबन्ध उन्नति को हानि से सुरक्षित रखने के लिए विदेश से उत्पदान व लाने वाली वस्तुएँ व यंत्र पर पाबंदी निर्धारित करते हैं, शरन इस की गुंजाईश है, सहीह मुसलिम की ये हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है के हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इस कर्म से मना किया के सामान व सामग्री को आगे बढ़ कर प्राप्त कर लिया जाए यहाँ तक के वह बाज़ार पहुँच जाए।  

(सहीह मुसलिम, किताब उल बुयूअ, हदीस संख्याः 3894)  

इस सिलसिले में फुक़्हा किराम (धर्मशास्त्री) ने स्पष्टीकरण की है के किसी स्थान से लाए जाने वाला सामान व सामाग्री यदि नियुक्त सदस्य के बीच रहे तथा खुले बाज़ार में ना आए तो कीमतें गिरी होंगी तथा निवासी नाग्ररिकों को नुकसान योग्य होगा, इस लए हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इस से मना किया।  

यदि इस के कारण से हानि व घाटा ना हो तो मना नहीं, जैसा के अल्लामा इब्न नुजैम मिस्री रहमतुल्लाहि अलैह ने अल बहरुर राईख शरन कंज़ुल दखाईख में लिखा है।  

अर्थात राष्ट्रिय शासन का अनुसार करते हुए स्मगलिंग व तस्करी (Smuggling) के द्वारा कोई चीज़ व वस्तु लाने से दूर रहना चाहिए क्यों के मुसलमान किसी देश में रहता है तथा इस देश के कानून जिस सीमा तक इसलामी शरीअत के विरुद्ध ना हो उस सीमा तक उस पर कर्म व अमल करने में समस्या नहीं।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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