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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2018 -    मंजे, सांचक, मेहंदी की रीति-रिवाज का आदेश
Country : ,
Name : वहाज मुहम्मद खान
Question:     विवाह में जो रीति-रिवाज होती हैं वह कहाँ तक श्रेष्ठ है?  मांजे, सांचक, मेहंदी, जुमागी आदि यदि किया जाए तो क्या जाए तो क्या होगा?
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Answer:     विवाह या अन्य उत्सव व अनुष्ठान पर शरीअत की सीमा में रहते हुए समारोह स्थापित किया जाए तो कोई समस्या नहीं परन्तु अश्लीलता (बेपरदगी) के साथ ग़ैर-महरम (अनजान व्यक्ति) के सामने बिना हिजाब घूमना फिरना, साली या किसी ग़ैर-महरम से अंगुलि पकड़वाना, ये सब कार्य व कर्म नाजायज़ व हराम है।  

हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश हैः-

भाषांतरः जो कोई शहवत (वासना व इच्छा) के साथ किसी अजनबी के सुन्दरता के स्थान को देखता है तो क़ियामत के दिन इ की आँखों में सीसा पिघला कर ड़ाला जाएगा।  

(बिदायह वन निहायह, किताब उल कराहिया, जिल्द 04, पः 458)  

ग़ैर-महरम को छूना एवं सम कना कठिन निषिद्ध है, इस विषय में हदीसों में चेतावनियाँ आई हैं अर्थात हिदायह में हैः-

जो व्यक्ति किसी ग़ैर-महरम महिला के हाथ को छुए तो क़ियामत के दिन इसके हाथ पर चिंगारह रखा जाएगा।  

(बिदायह वन निहायह, किताब उल कराहिया, जिल्द 04, पः 4590  

अर्थात माँजे, साँचक, मेहंदी, जुमागी आदि के अवसर पर जो शरीअत के विरुद्ध रीति-रिवाज किए जाते हैं वह सब छोड़ने के योग्य है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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