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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2017 -    विवाह में दहेज का माँगना
Country : यू पी, हिंदुस्तान,
Name : फरीद
Question:     विवाह में दहेज का माँगने की शरई आदेश से सचेत करें।
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Answer:     दहेज आदि का माँगना एवं इस पर दबाव ड़ालना शरीअत के आधार में नाजायज़ है।  किसी मोमिन के लिए बिना अत्यन्त अवश्यकता किसी के सामने हाथ फैलाना व माँगने जायज़ नहीं।  

हदीसों में इस की चेतावनी आई है।  अर्थात जामेअ तिरमिज़ी में हदीस पाक हैः-

हज़रत सैयदना हबशी बिन जनादह सलूली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से एक लम्बी रिवायत है जिस में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का ये धन्य आदेश वर्णन हैः धनी व स्वस्थ्य भाग के लिए माँगना हलाल नहीं है सिवाए दरिद्र व दुर्बल के या अत्यन्त अवश्यकता वाले के एवं जो व्यक्ति लोगों से धन में समावेस व बढ़ोतरी के लिए प्रश्नः करे तो ये (प्रश्न करना) इस के लिए क़ियामत के दिन इस के चेहरे पर खरोचे एवं खराश की सूरत में होगा  तथा नरक के अँगारे के रूप में नमूदार होगा जिसे वह खाएगा, जिस का जी चाहे वे अपने लिए ये यातना कम करे या बढ़ाए।  

(जामेअ तिरमिज़ी, किताब उल ज़काह, जिल्द 01, पः 141, हदीस संख्याः 590)  

हाँ किन्तु बिना लिहाज़ रीति-रिवाज बिना किसी माँग, केवल अपनी प्रसन्नता से आपस में एक दूसरे को विवाह के अवसर पर तोहफा दें तो इस में समस्या नहीं।  बल्कि इसलाम धर्म ने आपस में तोहफा देने को स्नेह व प्रेम बाखी रहने का माध्यम एवं समावेस का कारण घोषित किया है।  

जैसा के सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश है।  

(कंज़ुल उम्माल, हदीस संख्याः 15057)  

इसी प्रकार विवाह-ब्याह के अवसर पर विशेष रूप से तोहफा आदि देना जायज़ है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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