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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2007 -    क़ब्रिस्तान की जमीन पर व्यापारिक काम्प्लेक्स
Country : मुम्बई,
Name : मुहम्मद अ़लीमउद्दीन
Question:     एक व्यक्ति क़ब्रिस्तान के लिए ज़मीन धर्मस्व व वृतिदान किए हैं इस क़ब्रिस्तान में दफन करना व शवाधान करने जारी है।  कुछ लोग क़ब्रिस्तान की सड़क से 500 गज़ जमीन बेचने के लिए कह रहे हैं वह इस स्थान पर व्यापारिक काम्प्लेक्स रचना करना चाहते हैं।  ऐसी स्थिति में वृतिदान व धर्मस्व एवं धर्मादा करने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
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Answer:     जिस चीज़ को वृतिदान व धर्मस्व कर दिया जाए वह शरन वृतिदान करने वाले की संपत्ति बाखी नहीं रहती।  दान करने वाले वृतिदान चीज़ व वस्तु का ना खुद मालिक रहता है तथा ना किसी दूसरे को मालिक बना सकता है इस लिए इस वृतिदान व धर्मस्व की हुई चीज़ को बेचना, किराये पर देना, ना रहन रखना जाइज़ नहीं।  

इसी प्रकार वह विरासत में भी शामिल नहीं होगी तथा वारिस लोग इस के मालिक नहीं होंगे।  

जैसा के दुर्रुल मुक़तार, जिल्द 03, किताब उल वख्फ, पः 392 में उल्लेख हैः-

भाषांतरः वृतिदान व धर्मस्व करने वाले के लिए वृतिदान को झूठा व समाप्त करना जाइज़ नहीं तथा वृतिदान विरासत में नहीं आता, इसी पर फतवा है।  

अधिक तनवीर उल अबसार, मअ दुर्रुल मुक़तार, जिल्द 03, पः 402 में उल्लेख हैः-

भाषांतरः जब वृतिदान (सम्पूर्ण शर्तों के अनुसार) पूरा हो जाए तो वृतिदान की हुई चीज़ ना किसी की संपत्ति रहती है ना इस को किसी की संपत्ति में दिया जा सकता है तथा ना किराये पर दिया जा सकता है तथा ना रहन पर।  

जब जमीन के मालिक ने इस को क़ब्रिस्तान के लिए वृतिदान व धर्मस्व कर दिया है तो वह हिस्सा जमीन वृतिदान करने वाले की संपत्ति ना रही।  अर्थात क़ब्रिस्तान की धर्मस्व व धर्मादा जमीन का वह भाग व हिस्सा जो सड़क के निकट है इस को व्यापारिक काम्प्लेक्स के लिए या किसी और उद्देश्य से बेचना शरन जाइज़ नहीं।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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