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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2006 -    अश्लील चित्र व तस्वीरें देखना अत्यन्त धृष्ट कर्म है
Country : हिंदुस्तान,
Name : फहीम
Question:     अस्सलामु अलैकुम!  मुझे अपने मित्र से आप के वेबसाइट के विषय में मालूम हुआ, इस से बहुत मालूमात होते हैं, मेरा एक प्रश्न है मेरी सहायता फरमाएं, मुझे ये प्रश्न करने में बहुत हया व लज्जा को विनाश किया जा रहा है परन्तु ये प्रश्न करना अवश्य है।  

जब मैं टीवी देखता हुं तो कुछ फिल्म जिस में अश्लीलता व धृष्ट चित्र होते हैं ये देखते हुए मैं कभी उलझन में आ जाता हुँ एवं कुछ प्रवाही व गाड़ा निकलता है तो क्या केवल इस को धो लेने से नमाज़ पढ़ी जा सकती है या नमाज़ से पूर्व स्नान करना वाजिब व अनिवार्य है?
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Answer:     वअलैकुम असल्लाम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह!  विदेशी व अजनबी महिला पर नज़र ड़ालना, अश्लील धृष्ट चित्र देखना अत्यन्त धृष्ट कर्म है चाहे टीवी या इंटरनेट के द्वारा हो या प्रत्येक्ष हो, ये पाप व अपराध है।  इस के कारण से संसार में भी नुकसान हैं एवं आखिरत व परलोक में बी अल्लाह तआला की कृपा से दूरी रहेगी।  

इस पाप व अपराधी के अपराधी व्यक्ति पर अल्लाह तआला की यातना व विपद की है।  हदीस पाक हैः-  

हज़रत हसन बसरी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है।  फरमाया मुझे ये हदीस पहुँची है के हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया।  अल्लाह तआला ने विपद की है।  जानबूझकर देखने वाले पर और इस पर जो बिना अवश्यकता अपने आप को दिखाए।  

(बैहखी शुअबुल इमान, हदीस संख्याः 7538)  

आप के लिए अनिवार्य है के इस धृष्ट कर्म को छोड़ दें, अल्लाह तआला की आज्ञालंघन व आज्ञाभंग से ड़रें एवं पूर्व पापों पर पश्चाताप करें, भविष्य में ना करने का पुख्ता उद्देश्य करें, इस प्रकार अल्लाह तआला के दरबार में तौबा करें, इस प्रश्न के समय आप को लज्जा आना ईमान के लक्षण हैं।  हया व लज्जा की इस भावना को आप इस प्रकार बढ़ाएँ के आप की निगाह किसी धृष्ट चित्र की ओर उठने ना पाएँ।  

जो गाड़ा मूल निकल रहा है वह मज़ी (पुरःस्थ ग्रंथि) है, इस के निकलने से वुज़ू टूटता है स्नान वाजिब व अनिवार्य नहीं हाता, हाँ यदि मूल निकलने के समय वासना हो तो वह वीर्य व शुक्र है।  इस के निकलने से स्नान करना वाजिब व अनिवार्य है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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