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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:2000 -    गर्भपात व अकालोत्पत्ति का आदेश
Country : सऊ़दी अ़रब,
Name : खुतुबउद्दीन
Question:     अस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह! ज़ैद को मेड़िकल व चिकित्सा कारण से गर्भपात व अकालोत्पत्ति करवाना हो तो किस समय र्भ गिरवा सकते हैं? गर्भ में आत्मा कब आती है?  क़ुरान व हदीस के हवाले भी वर्णन करें।
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Answer:     वाअलैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह!  गर्भ में आत्मा आघात व उत्पन्न होने के बाद इस को गर्भपात व अकालोत्पत्ति करना निषिद्ध व नाजायज़ है।  अल्लाह तआला ने इस से मना किया है।  अर्थात अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः एवं तुम दरिद्रता व निर्धनता के भय से अपनी संतान की हत्या मत करो।  

(सुरह बनी इसराईलः 17:31)  

आत्मा जन्म होने से पूर्व गर्भपात करना भी परिणाम के अनुसार से हत्या के तात्पर्य में है।  अर्थात बिना कारण ये भी निषिद्ध व नाजायज़ ही है।  

आत्मा कब उत्पन्न होती है इस से संबंधित सहही बुखारी में हदीस पाक वर्णन हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है, उन्हों ने फरमाया सत्य रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः निश्चय तुम में से कोई अपनी माँ के पेट में 40 दिन नुत्फह (अक्षरशः प्रवाही का बूंद) के रूप में रहता है।  फिर 40 दिन खून के गठ्ठल के रूप में रहता है, फिर 40 दिन आमिष टुकड़े के रूप में रहता है।  फिर अल्लाह तआला इस के पास 40 कलिमों के साथ एक फरिश्ता भेजता है, वह फरिश्ता इस का अमल (कर्म), इस की उम्र, इस का जीविका (संपोषण) लिखता है तथा ये लिखता है के वह भला है या बुरा, फिर इस में आत्मा (रूह) फूंकता है।  

(सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 3036)  

इस हदीस पाक से मालूम होता है के 120 दिन में आत्मा व रूह ड़ाली जाती है।  आत्मा फूंके जाने से पूर्व जब के गर्भ में खून के गठ्ठल के रूप में हो या लुथड़े की स्थिति में हो तो गर्भपात व अकालोत्पत्ति करने की सम्भावना व गुंजाईश कुछ कारण के आधार पर हो सकती है।  

उदाहरण माँ अत्यन्त शारीरिक कमज़ोरी की कठिनाई है, गर्भ का बोझ सहन करने की क्षमता व शक्ति नहीं रखती या गर्भवती या बच्चे की जान जाने का खतरा व संगट हो या दूध की कमी के कारण से वर्तमान बच्चे की जान को संकट व खतरा हो एवं पति सामाजिक रूप से दूध के लिए कोई और प्रबन्ध ना कर सकता हो।  

इन स्थितियों में 120 दिन के समय से पूर्व गर्भपात व अकालोत्पत्ति की सम्भावना व गुंजाईश उस समय निकल सकती है जब के कोई विशेषज्ञ वैद्य व ड़ाक्टर ये निर्देश करे।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 05, पः 356 में उल्लेख है।  

एवं अधिक रद्दुल मुहतार, जिल्द 05, पः 305 में भी उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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