***** For other Fatawa, please click on the topics on the left *****



विषय की सूची

فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

Share |
f:1998 -    गाना एवं संगीत सुनने का आदेश
Country : कर्नाटक,
Name : अहमद
Question:     यदि कोई वुज़ू से हो तो क्या वह गाना या संगीत सुन सकता है?
............................................................................
Answer:     गाना सुनना एवं संगीत सुनना, शरीअत के आधार में निषिद्ध एवं पाप है।  हदीसों में उस की निषिद्ध तथा कठिन चेतावनी आई है।  गाने बजाने की चेतावनी से संबंधित इमाम बैहखी की शुअबुल इमान में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः गाना बजाना दिल में छल व कपट को उगाता है जिस प्रकार पानी खेती को उगाता है।  

(शुअबुल इमान, जिल्द 04, पः 972)  

गाने बजाने वाले के कँधों पर शैतान नाचते हैं जैसा के तफसीराते-अहमदिया, पः 400 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जो कोई व्यक्ति गाने के द्वारा अपनी आवाज़ को बुलंद करे अल्लाह तआला उस पर 2 शैतानों को स्थापित कर देता है, इन में से एक इस कँधे पर और दुसरा इस कँधे पर होता है तथा दोनों लगातार नाचते रहते हैं यहाँ तक के ये व्यक्ति ही शान्त हो जाए।  

जैसा के दुर्रुल मुक़तार, जिल्द 05, पः 542 में उल्लेख हैः-

भाषांतरः सम्पूर्ण प्रकार के चीज़ें जो मानव को अचेत व असवादान बनाता है हराम है।  

अर्थात किसी मुसलमान के लिए जायज़ नहीं के गाना या संगीत सुने चाहे वह वुज़ू से हो या बिना वुज़ू से हो, प्रत्येक स्थिति में इस से दूर रहना अवश्य है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
All Right Reserved 2009 - ziaislamic.com