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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:1996 -    अपनी विरचन वस्तु पर किसी और कम्पनी का उपनाम लगाना
Country : दिल्ली, हिंदुस्तान,
Name : अहसान शरीफ
Question:     आज कल उपयोग किया जाने वाले सामान व सामग्री कम्पनियों में तैयार हो रहा है।  इस विषय में कुछ कम्पनियाँ असाधारण नामवर हो चुकी हैं एवं लोग कम्पनी की प्रसिद्ध पर वस्तु खरीद रहे हैं।  कम्पनी के नाम से वस्तु को गुण व क्वालिटी का अंदाज़ा लगाया जाता है।  देख ने में आ रहा है के कुछ स्थानिक व लोकल कम्पनियाँ प्रसिद्ध व नामवर कम्पनी का नाम एवं इस का उपनाम व लेबल अपने वस्तु व प्राडक्ट्स पर लगा कर बेच रही हैं, क्या इसाम धर्म में ये कर्म जायज़ है?
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Answer:     एक कम्पनी की विरचन वस्तु पर किसी दूसरी कम्पनी का लेबल लगाना धोखा व फरेब है जो शरीअत के आधार में नाजायज़ व हराम है।  किसी नामवर व प्रसिद्ध कम्पनी का नाम उपयोग करते हुए अपनी विरचन वस्तु पर इस का लेबल लगाना इस बात के लक्षण है के विरचन इसी कम्पनी की बनाई हुई है।  

हालांकि विरचन वस्तु इस कम्पनी की बनाई हुई नहीं होतीं।  इस का उद्देश्य व लक्ष्य ये होता है के खरीदार नामवर व प्रसिद्ध कम्पनी का लेबल देख कर विचार कर ले के इन प्राडक्ट्स का वही स्तर एवं वही क्वालटी व गुणवत्ता है जिस कम्पनी का लेबल विचरन वस्तु व चीज़ पर लेबल लगाया है एवं वह खरीदारी के लिए आकर्षित हो जाए, जब के इसलामी शरीअत में ये नाजायज़ व हराम है।  

इस में दे प्रकार का धोखा हैः-

(1)- एक तो खरीदार को खोखा देना है के प्राडक्ट इस नामवर व प्रसिद्ध कम्पनी के हैं।  

(2)- दूसरे शरीअत के विरुद्ध तरीके पर लेबल वाली कम्पनी के अधिकार का उपयोग करना है ये भी एक प्रकार का धोखा है के अपनी विरचन वस्तु पर दूसरी कम्पनी का लेबल लगा लिया जाए, तथा पावन शरीअत में धोखा व फरेब से संबंधित कठिन व कड़ी चेतावनी आई है।  

सहीह मुसलिम में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है के हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जो हम पर तलवार उठाएं वे हम में से नहीं तथा जो हम को धोखा दे वे हम में से नहीं।  

(सहीह मुसलिम, जिल्द 01, किताब उल इमान, पः 70, हदीस संख्याः 101 / जामेअ तिरमिज़ी, जिल्द 01, हदीस संख्याः 1236)  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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