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فتاویٰ > व्यवसाय > हलाल व हराम का वर्णन

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f:1994 -    गणतंत्र-दिवस में भाग लेना
Country : हैद्राबाद, हिंदुस्तान,
Name : सैय्यद मुजीब अ़ली
Question:     26 जनवरी को देश भर में गणतंत्र-दिवस बड़े उच्च रूप से मनाया जाता है।  दिल्ली के अतिरिक्त नगर के पूर्ण नगर में शिक्षालय, कॉलेज, एवं अन्य संस्थाओं में इसका प्रबन्ध होता है।  गणतंत्र-दिवस व रिपब्लिक डे (Republic Day) के इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यकर्म किए जाते हैं, जिन में संगीत एवं नाच भी पेश किया जाता है।  पूछना ये है के गणतंत्र दिवस के अवसर पर पेश किए जाने वाले इन सांस्कृतिक कार्यकर्मों में भाग लेना व शरीक होने शरन कैसा है?  वास्तव में मेरा लड़का जिस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करता है वहाँ के प्रबन्धन की ओर से पूर्ण विद्यार्थियों के अभिभावकों के  नाम निमन्त्रण पत्र भेजा गया है इस प्रकार मैं भी गणतंत्र दिवस के समारोह में दावत दिया गया हुँ, मुझे इस समारोह में शरीक होना चाहिए या नहीं?  शरीअत के आदेश सचेत कराएँ।
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Answer:     26 जनवरी 1950 को हिंदुस्तान पूर्ण देश के लिए कार्यन्विति में घोषित पाया एवं हिंदुस्तान में प्रजातांत्रिक व लोकतन्त्र देश स्थापित हुआ।  भारतवासियों के लिए ये दिन एक ऐतिहासिक स्थिति रखता है।  अर्थात गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय उन्नति व राष्ट्रीय प्रगति के उद्देश्य से ऐसे शैक्षिक कार्यकर्म जो गाने-बजाने, नाचने एवं अन्य शरीअत के विरुद्ध से पवित्र हों पेश किए जाएँ तथा इस में शिरकत व भाग लिया जाए तो मना नहीं किन्तु गाने व बजाने पर आधारित समारोह करना तथा इस प्रकार के समारोह में जाना इसलामी शरीअत के रूप से निषिद्ध व नाजायज़ है।  गाने बजाने की निषिद्ध से संबंधित इमाम बैहखी की शुअबुल इमान में हदीस पाक व्याख्या हैः-

भाषांतरः हज़रत सैयदना जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है हज़रत रसूलउल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः गाना बजाना दिल में निफाख (कपट व छल) को उगाता है जिस प्रकार पानी खेती को उगाता है।  

(शुअबुल इमान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 4888)  

गाने बजाने वाले के कंधों पर शैतान नाचते हैं जैसा के तफसीरात अहमदिया, पः 400 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जो कोई व्यक्ति गाने के द्वारा अपनी आवाज़ ऊँची करे अल्लाह तआला इस पर 2 शैतानों को नियुक्त कर देता है।  इन में से एक इस के कंधे पर एवं दुसरा उस कंधे पर होता है तथा दोनों लगातार नाचते रहते हैं यहाँ तक के ये व्यक्ति ही शान्त हो जाए।  

जैसा के दुर्रुल मुक़तार, जिल्द 02, पः 245 पर उल्लेख है।  

हदीसों में वर्णन एवं फिक़्ही स्पष्टीकरण से गाने बजाने की निषिद्ध व वर्जित मालूम होती है।  उपर्युक्त वर्णन के बिना पर नाच-गाने कार्यकर्मों में शरीक होना शरन हराम व नाजायज़ है।  हाँ ऐसे कार्यकर्म जिन में शैक्षिक प्रदर्शन किए जाएँ तो इस में शिरकत की जा सकती है।  

शरन कोई समस्या नहीं, बल्कि संरक्षक लोग व अभिभावकों शैक्षिक कार्यकर्म व प्रदर्शन के समय उपस्थिति हों तो छात्रों के छिपे गुण उत्पन्न होने के साथ साथ उनको अधिक प्रोत्साहन होता है।  

आप के बेटे के विद्यालय में जहाँ गणतंत्र दिवस के अवसर पर जो समारोह होने वाला है यदि इस में नाच-गाने, झूमने, अश्लीलता जैसे शरीअत के विरुद्ध कार्यकर्म ना हों तो आप शरीक हो सकते हैं इस में कोई समस्या नहीं।  यदि इस में संगीत व फिल्मी गीत, गाना बजाना एवं शिष्टाचार व सभ्याचार के विरुद्ध एवं शरीअत के विरुद्ध चीज़ें शामिल हों तो शिरकत करना शरीअत के अनुसार से भी जायज़ नहीं एवं शिष्टाचार व सभ्याचार के अनुसार से भी श्रेष्ठ नहीं।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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