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فتاویٰ > व्यवसाय > कब्ज़े का वर्णन

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f:1943 -    चुराई हुई एवं कब्ज़ा की हुई चीज़ों का लेन-देन
Country : रियाज़,
Name : सैय्यद अहमद
Question:     यदि बाज़ार में कोई ऐसी चीज़ व वस्तु बेचता हो जिस के बारे में मूख्य रूप से ये विचार है के वह चीज़ चोरी की है तो शरीअत के दृष्टिकोण से इस को खरीदना श्रेष्ठ है के नहीं, इसके बावजूद यदि वह चीज़ खरीद कर लीजाए तो इस के संबंध से शरीअत में क्या आदेश है?
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Answer:     बेची जानी वाली किसी नियुक्त व निश्चित चीज़ व वस्तु के बारे में यदि ये बुद्धि में अधिक विचार हो के ये चीज़ चोरी या कब्ज़े के द्वारा प्राप्त की हुई है ते यो जानते हुए इस वस्तु व चीज़ को खरीदना शरीअत के अनुसार व आधार में उचित नहीं।  

हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने इस पर कठिन व गंभीर चेतावनी वर्णन की है अर्थात शुअबुल इमान लिल बैहखी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः हज़रत अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं के आप ने आदेश कियाः जो व्यक्ति किसी चोरी के सामान को ये जानते हुए के ये चोरी का है खरीद ले तो वह व्यक्ति उसके पाप व वबाल में साझीदार व भागीदार हो गया।  

(शुअबुल इमान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 5258)  

किन्तु मार्केट व बाज़ार में बेची जाने वाली चीज़ों में जाइज़ तरीके से प्राप्त किया हुए चीज़ों के साथ नाजाइज़ तरीके से प्राप्त की हुई चीज़ें तथा अधिकतर वस्तु व साधन जाइज़ तरीके से प्राप्त की हुई हों, अधिक खरीदने वाले को नियुक्त व निश्चित चीज़ के संबंध से इस बात का ज्ञान ना हो के ये धन चोरी का है या कब्ज़ा किए हुआ है तो पावन शरीअत ने सोंच-विचार के प्रभाव का अनुसार करते हुए समस्या को दूर करने के लिए खरीदने की सम्भावना व गुंजाइश रखी है।  

मजमअ उल अन्हुर, पः 382 पर उल्लेख है।  

यदि चोरी या कब्ज़े की चीज़ जानते हुए भी खरीद ली जाए तो उसके मालिक तक पहुँचना अनिवार्य है।  यदि मालिक का पता ना चले तो इस का सदखा कर देना अवश्य है।  इस को अपने उपयोग में लाना श्रेष्ठ नहीं।  

जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 05, पः 273 में उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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