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فتاویٰ > व्यवसाय > कब्ज़े का वर्णन

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f:1942 -    दुसरों की ज़मीन पर मकान की रचना करना
Country : हिंदुस्तान,
Name : खदीर साहब
Question:     अधिकतर देखने में आता है के कुछ लोग अपनी क्षमता व शक्ति के बल बूते पर दुसरों की ज़मीन पर नाजाइज़ कब्जा जमा लेते हैं इन का ये कर्म कैसा है?
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Answer:     अल्लाह तआला ने अपने बन्दों को हलाल व पवित्र रिस्ख (संपोषण व जीविका) प्रदान किया है एवं इन्हें आदेश दिया के वह अल्लाह तआला का प्रदान किया हुआ पवित्र व शुद्ध संपोषण खाएं तथा इस की धन्यवाद संपादन करें।  जैसा के अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः अए इमान वालो!  हम ने तुम को पवित्र-सुथरी चीज़ों से जो रिस्ख प्रदान किया है इस में से खाओ तथा अल्लाह तआला के आगे कृतज्ञता दिखालाओ, यदि तुम केवल इसी की इबादत करते हो।  

(सुरह अल बक़राः 02:172)  

इसलामी सिद्धान्त अर्थनीति व अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण नियम ये है के हलाल व जाइज़ तरीके से धन प्राप्त किया जाए तथा नाजाइज़ व गलत तरीके से कभी भी धन प्राप्त ना किया जाए।  अल्लाह तआला का आदेश हैः-

भाषांतरः अए इमान वालो! एक दूसरे का धन नाजाइज़ तरीके से मत खाओ किन्तु ये के तुम्हारे बीच आपसी संतुष्टि से व्यापार हो।  

(सुरह अन निसाः 04:29)

दुसरों की ज़मीन में व्यवधान व दखलंदाज़ी करना, इस पर अपने अधिकार का दावा करना, कठिन व गंभीर पाप है तथा इस पर हदीसों में कठिन व गंभीर चेतावनी आई है।  

जैसा के सहीह बुखारी में हदीस पाक हैः

भाषांतरः हज़रत सईद बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है
फरमाते है हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जिस ने एक बालिश्त भर ज़मीन अत्याचारी रूप से प्राप्त किया क़ियामत के दिन इस को 7 ज़मीनों का बदला पहुँचाया जाएगा।  

(सहीह बुखारी, जिल्द 01, पः 454 / सहीह मुसलिम, जिल्द 02, पः 33 / ज़ुजाजातुल मसाबीह, जिल्द 02, पः 308)  

भाषांतरः हज़रत सालिम अपने पिता हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित करते हैं- हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जो व्यक्ति शास्त्र विरुद्ध व नाहक़ किसी की थोड़ी सी ज़मीन ले इस को क़ियामत के दिन सातो ज़मीन नीचे तक धंसाया जाएगा।  हज़रत यअला बिन मुर्रह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है फरमाते हैं मैं ने हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को आदेश करते सुना जो व्यक्ति अन्याय युक्त व नाहक़ किसी ज़मीन को प्राप्त कर लेगा इस पर ये कठिनाई ड़ाली जाएगी के वह इस की सारी मिठ्ठी को मेहशर में उठाए फिरे।  

(मुसनद इमाम अहमद, हदीस संख्याः 16913 / ज़ुजाजातुल मसाबीह, जिल्द 02, पः 309)  

भाषांतरः सरकार पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम आदेश करते हैं जो व्यक्ति अत्याचार करते हुए बालिश्त भर ज़मीन भी किसी की ले ले तो अल्लाह तआला इस को इस कर्म का तकलीफ देगा के वह 7 ज़मीनों की प्रति तक इसको खोदता जाए फिर क़ियामत के दिन तक इस का तौख व बदला इसके गले में पड़ा रहेगा यहाँ तक के लोगों के बीच निर्णय कर दिया जाए।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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