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فتاویٰ > व्यवसाय > अमानत

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f:1936 -    अमानत रखी हुई राशि से मुनाफा प्राप्त करना कैसा है?
Country : जयपूर,
Name : रहीम खान
Question:     एक महिला ने अपना जायदाद अपने एक भतीजे के द्वारा बेची तथा राशि प्राप्त होने के बाद भतीजे के पास ही अमानत रखी।  इस महिला का भतीजा वह राशि उपयोग कर रहा है तथा उन्हें महाना कुछ नियुक्त व निश्चित पैसे रवाना करता है।  महिला ने कहा तुम मुझे ये राशि क्यों दे रहे हो?  उत्तर में भतीजे का कहना है के आप इसे जायदाद का मुनाफा समझें, महिला ने उत्तर दिया के मैं इस की मालिक नहीं हुं तो इस का मुनाफा कैसे ले सकती हुँ?  इस समय भतीजे ने कहा के मैं ये राशि अपनी ओर से दे रहा हुँ।  क्या इस महिला के लिए ये राशि लेना जाइज़ है या नहीं?
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Answer:     उपर्युक्त वर्णन विषय में महिला को उन का भतीजा जो राशि व पैसे दे रहा है उसे बेची हुई जायदाद का मुनाफा घोषित कर देना गलत है, जैसा के महिला ने कहा “मैं इस की मालिक नहीं हुँ तो इस का मुनाफा कैसे ले सकती हुँ”?  

अमानत रखी हुई चीज़, चाहे राशि व पैसे हो या सामान आदि उसे मालिक की आज्ञा के बिना उपयोग करना शरन जाइज़ नहीं, अर्थात प्रश्न के अनुसार भतीजा, फूफी की ओर से अमानत रखाई हुई राशि व पैसे उपयोग कर रहा है यदि इस का उपयोग करना मालिका की आज्ञा के बिना हो तो ये शरीअत के आधार में मना (ममनुअ) है।  

ये कर्म वास्तव में खयानत है।  इस से इन्हें दूर रहना अवश्य है.  तथा यदि आज्ञा ले कर उपयोग करते हों तो भतजे की ओर से फूफी को जो महाना राशि व रूपय मिल रहे हैं इस के जाइज़ होने की 3 स्थिति होंगीः-

(1)- यदि इस महिला का भतीजा इन्हें ये राशि व पैसे सचमुच अपनी ओर से उपहार के रूप में देता है तो महिला के लिए राशि लेना श्रेष्ठ है।  इस की निशानी व लक्षण ये है के इन का भतीजा इन्हें पैसे अमानत रखने से पूर्व भी उपहार दिया करता था या अब यदि वह पैसे वापस ले लें तब भी वह दस्तूर से उपहार व तोहफा दिया करें।  

(2)- यदि ऐसा ना हो तो भतीजे का ये कहना के मैं ये पैसे अपनी ओर से दे रहा हुँ, ज़बानी दावा है, ऐसी स्थिति में यदि वह इस पैसे को अपने प्रति अमानत में कर के लेती रहीं तो कोई समस्या व निर्मय नहीं फिर प्रति अमानत समाप्त हो जाए तो ना लिया करें।  

(3)- अमानत रखी हुई राशि व पैसे को वह व्यापार में लगा रहे हैं तो इस से प्राप्त होने वाले मुनाफे का प्रतिशत अपनी फूफी की संतुष्टि व सहमति से निश्चित व नियुक्त कर लें तथा मुनाफे का निश्चित किया हुआ प्रतिशत उन्हें दे दिया करें, इस के बजाए मुशखस राशि देना शरीअत के अनुसार व आधार में जाइज़ नहीं।  

इन 3 स्थित में से किसी भी स्थिति में पैसे व राशि लेना इन के लिए जाइज़ हैं, इस के अतिरिक्त अन्य स्थिति जाइज़ नहीं।  

{और अल्लाह तआला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़ियाउद्दीन नक्षबंदी खादरी,

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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