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f:1676 -    क्या फातिहा खाने या पीने की चीज़ के सामने रख कर दी जा सकती है?
Country : ऑस्ट्रेलिया,
Name : नदीम
Question:     अस्सलामु अ़लैकुम मुफती साहब!  मेरा एक प्रश्न है के क्या फातिहा खाने या पीने की चीज़ के सामने रख कर दी जा सकती है?
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Answer:     फातिहा कुछ जाइज़ तथा अच्छे कर्म के सारांश व समाहरण का नाम है।  इस में दूसरों को भोजन कराना, क़ुरान की तिलावत करना, ई़साले सवाब (दूसरों को सवाब तोहफा करना) किया जाता है।  ये सब कार्य व कृत्य परिणाम देने की हदीसों में प्रतिष्ठा आई है।  

इसी लिए फातिहा देना मुसतहब व निर्धारित व परोपकारी है।  क़ंदख के युद्ध के अवसर पर हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के घर में सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने उस समय दुआ़ की जब के खाना सामने उपलब्ध था।  

जैसा के सहीह बुखारी में विस्तार से रिवायत है, रिवायत का एक भाग दर्शन करेः-

भाषांतरः- हज़रत जाबेर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की पत्नी ने गोंधा हुआ आटा पेश किया तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम में पवित्र राल डाला तथा बरकत की दुआ़ की फिर हमारी हाँडी की ओर ध्यान किया, पवित्र राल ड़ाला तथा बरकत की दुआ की।  

(सहीह बुखारी, जिल्द 02, किताबुल मग़ाज़ी, हदीस संख्याः 3793)  

सुनन निसाई, जामेअ़ तिरमिज़ी, सुनन अबु दाउद, मुसनद इ़माम अहमद, शुअ़बुल इ़मान लिल बैहखी, मुसनद अब्द बिन हमीद, अल जामेअ़ अल कबीर लिस सुयूती तथा मअ़रिफतिस सहाबा ली अबी नुअ़म आदि में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना मुआ़ज़ बिन अबदुल्लाह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु अपने पिता से वर्णित करते हैं, उन्हों ने फरमाया के... हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः खुलहुवल्लाहु अहद तथा खुल आ़उ़ज़ु बि रब्बिल फलख (सुरह अल फलख तथा सुरह अन नास) को सवेरे व शाम3-3 बार पढ़ा करो तो इस से प्रत्येक चीज़ से तुम्हार बचाओ व सुरक्षा होगी।  

सुनन नसाई, हदीस संख्याः 5445
जामेअ़ तिरमिज़ी, हदीस संख्याः 3924
सुनन अबु दाउद, किताबुल आ़दाब, हदीस संख्याः 5084
मुसनद इ़माम अहमद, हदीस संख्याः 23332
शुअ़बुल इ़मान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 2467
मुसनद अब्द बिन हमीद, हदीस संख्याः 496
अल जामेअ़ अलकबीर लिल सुयूती, हदीस संख्याः 375
मअ़रिफतिस सहाबह ली अबी नुअ़म, हदीस संख्याः 2267

फातिहा में जो सूरतें तिलावत की जाती हैं उन को सवेरे व शाम पढ़ा करने की हदीस वर्णन में हिदायत फरमाई गई है।  अधिक सहीह बुखारी, जामेअ़ तिरमिज़ी, सुनन अबु दाउद, मुसनद इमाम अहमद, सहीह इब्न हिब्बान, शुअ़बुल इमान लिल बैहखी तथा कंज़ुल उ़म्माल आदि में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदह आयशा सिद्दीखा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से वर्णित है के हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम जब धन्य बिस्तक पर होते तो प्रत्येक रात अपने धन्य हथेली को मिलाते फिर इन पर दम फरमाते (इस पर दम फरमाने में) खुल हुवल्लाहु अहद, खुल आउ़ज़ू बिर्रबिल फलख, खुल आउ़ज़ु बिर्रब्बिन नास (सुरह इक़लास, सुरह फलख, सुरह नास) पढ़ा करते फिर इन को अपने पावन शरीर पर जहाँ तक हो सकता अपने पवित्र हाथ फेरते।  इस रूप से के पावन सरतथा मुबारक चेहरे से प्रारम्भ करते और सामने पूर्व पवित्र शरीर का मलते, ये कर्म 3 बार करते।  

सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 5017
जामेअ़ तिरमिज़ी, हदीस संख्याः 3730
सुनन अबु दाउद, किताबुल आदाब, हदीस संख्याः 5058
मुसनद इमाम अहमद, हदीस संख्याः 25595
शुअ़बुल इ़मान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 2570
सहीह इब्न हिब्बान, हदीस संख्याः 5544
कंज़ुल उ़म्माल हदीस संख्याः 41998

अल्लाह तआ़ला ने इ़मान वालोंको सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की पावन सेवा में दुरूद शरीफ व सलाम पढ़नेका आदेश दिया।  

अर्थात क़ुरान करीम में अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- निश्चय अल्लाह तआ़ला और इस के फरिश्ते नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम पर दुरूद भेजते हैं, अए इ़मान वालो!  तुम भी आप की पावन सेवा में दुरूद पढ़ा करो, तथा कसरत से सलाम पेश किया करो।  

(सुरह अल अहज़ाबः 33:56)  

सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की पावन सेवा में सलाम पेश करने वालों के लिए हदीसों में गवाही तथा शुभ सूचना दी गई हैः सरकार पाक सल्ल्ललाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः

जिब्रील अलैहिस सलाम मुझ से मिल कर निवेदन किएः मैं आप को समाचार देता हुं के अल्लाह तआ़ला कहता हैः जो व्यक्ति आप की सेवा में सलाम पेश करे मैं इस पर सलाम भेजुंगा।  तथा जो व्यक्ति आप की सेवा में दुरूद पेश करे मैं इस पर रहमत प्रकट करुँगा।  

(मुसतदरक अ़ला सहिहैन, किताबुस सलाह, हदीस संख्याः 770 / मुसनद इमाम अहमद, हदीस संख्याः 1574 / अश शिफा बि तारीखी हुखूखिल मुसतफा, जिल्द 02, पः 75)  

जैसा के मुसतदरक अ़ला सहिहैन में हैः-

भाषांतरः- हज़रत अबुदल्लाह बिन अबु तल्हा रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है, वह अपने पिता से वर्णित करते हैं, हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम एक दिन प्रसिद्ध हुए तथा आप के चहरे अनवर पर प्रसन्नता के लक्षण उजागर थे, हम ने निवेदन कियाः या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम!  हम आप के चेहरे पर आनन्द देख रहे हैं?  तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः कारण ये है के एक फरिश्ता मेरी सेवा में उपस्थित हो कर विनती कियाः अए हम्द व सना के पैकर (मानवीकरण व मनुष्यगुणारोप) सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम !  निश्चय आप का पालनहार फरमाता हैः क्या आप इस बात से खुश नहीं के जब कभी आप का कोई उम्मती आप की सेवा में दुरूद पेश करे तो मैं 10 बार इस पर रहमत प्रकट करुँगा, तथा जो आप की सेवा में सलाम पेश करे मैं इस पर 10 बार सलाम भेजुंगा, तो सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने फरमायाः हाँ मैं सन्तुष्ट व खुश हुँ।  

(मुसतदरक अ़ला सहिहैन, किताब उल तफसीर, हदीस संख्याः 3534 / मुसन्नफ इब्न अबी शैबा, जिल्द 02, पः 398 / सुनन कुबरा लिन नसाई, हदीस संख्याः 9888)

इमाम तबरानी की मुअ़जम कबीर में इन शब्द के समावेश के साथ लिखते हैः-

भाषांतरः- आप का कोई उ़म्मती आप की सेवा में दुरूद पेश करे तो मैं 10 बार इस पर रहमत प्रकट करुँगा तथा मेरे फरिश्ते 10 बार इस के लिए मुक्ति की दुआ़ करेंगे।  तथा आप की सेवा में सलाम पेश करें तो मैं तथा मेरे फरिश्ते इस पर 10 बार सलाम भेजेंगे।  

हज़रत इब्न मसऊ़द रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत हैः-

भाषांतरः- निश्चय अल्लाह तआ़ला के कुछ फरिश्ते धरती में सैर करने वाले हैं जो मेरी उम्मत व संप्रदाय की ओर से मेरे पास सलाम पहुंचाते हैं।  

मुसनद इमाम अहमद, हदीस संख्याः 3484 / सुनन नसाई, हदीस संख्याः 1265 / मुसतदरक अ़ला सहिहैन, हदीस संख्याः 3535 / किताब उश शिफा, जिल्द 02, पः 79)  

तथा एक और रिवायते में हैः-

भाषांतरः- हज़रत वहब रज़ियल्लाहु तआला अन्हु वर्णित करते हैं हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश कियाः जो मेरी सेवा में 10 बार सलाम पेश करे जैसा इस ने एक गुलाम व दास आज़ाद किया।  

(किताब उश शिफा, जिल्द 02, पः 77)  

हज़रत सैयदना सिद्दीख अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है, सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की धन्य सेवा में दुरूद पढ़ना, आग के लिए ठण्डा पानी से अधिक पापों को मेटने वाला है, तथा आप की पावन सेवा में सलाम निवेदन करना गुलाम आज़ाद करने से अधिक उत्तम है।  

(किताब उश शिफा, जिल्द 02, पः 77)  

हज़रत इब्न उ़मर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायते हैः-

भाषांतरः- तुम्हारे नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम पर प्रत्येक शुक्रवार (जुमआ़) कसरत (अतिशय) से सलाम पेश किया करो, क्यों के प्रत्येक जुमआ़ वह तुम्हीर ओर से पवित्र सेवा में पेश होता है।  

(किताब उश शिफा,,जिल्द 02, पः 79)  

सहीह बुखारी की हदीस पाक से साबित हुआ के खाने सामने होते हुए प्रार्थना व दुआ़ करना जाइज़ है।  इस के विरुद्ध किसी रिवायत में खाना सामने रख कर दुआ़ करने की निषिद्ध वर्णित नहीं है।  

हदीसों में सवेरे व शाम सुरह फातिहा, सुरह इक़लास, सुरह फलख तथा सुरह नास पढ़ने का भी वर्णन है।  

फातिहा में यही होता है के उपर्युक्त वर्णन सूसरतें पढ़ी जाती हैं तथा सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की पावन सेवा में दुरूद शरीफ का नज़राना पेश किया जाता है, तथा इ़साले सवाब किया जाता है, ये सम्पूर्ण कर्म धन्य इसलामी शरीअ़त में जाइज़ व सम्मानित तथा मूल्यवान हैं।  

{और अल्लाह तआला सर्वेश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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