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f:1605 -    इस्तिखारा का उत्तर किस प्रकार मिलता है?
Country : यू के,
Name : अहमद
Question:     मैं जान्ना चाहता हुँ के इस्तिखारा का उत्तर कैसे मालूम होता है।  कुछ विद्वान कहते हैं के उत्तर के द्वारा मालूम होता है तथा कुछ कहते हैं के उत्तर को बुनियाद व नीव नहीं बनाया जा सकता।  मैं आप का सुझाव जान्ना चाहता हुँ।  धन्यवाद।
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Answer:     इस्तिखारा से संबंधित जामेअ़ तिरमिज़ी, हदीस संख्याः 482 में रिवायत व्याख्या हैः-

भाषांतरः- हज़रत जाबेर बिन अबदुल्लाह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है इन्हों ने कहा हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम हमें सम्पूर्ण महत्व कर्म व कार्य में इस्तिखारा की शिक्षा फरमाते जिस प्रकार हमें क़ुरान करीम की सूरत की शिक्षा फरमाया करते।  सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम आदेश फरमाते हैः जब तुम में से कोई किसी कार्य का उद्देश्य करे तो वे फर्ज़ के अतिरिक्त 2 रकात नमाज़ संपादन करे फिर ये दुआ़ पढ़ें-

اللَّهُمَّ إِنِّى أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلاَ أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلاَ أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلاَّمُ الْغُيُوبِ اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ خَيْرٌ لِى فِى دِينِى وَمَعِيشَتِى وَعَاقِبَةِ أَمْرِى أَوْ قَالَ فِى عَاجِلِ أَمْرِى وَآجِلِهِ فَيَسِّرْهُ لِى ثُمَّ بَارِكْ لِى فِيهِ وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ شَرٌّ لِى فِى دِينِى وَمَعِيشَتِى وَعَاقِبَةِ أَمْرِى أَوْ قَالَ فِى عَاجِلِ أَمْرِى وَآجِلِهِ فَاصْرِفْهُ عَنِّى وَاصْرِفْنِى عَنْهُ وَاقْدُرْ لِىَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِى بِهِ۔

लिप्यंतरणः- अल्लाहुम्मा इन्नी असताहीरुका बी इ़लमिका वा असतखदिरुका बिखुदरातिका वा असअलुका मिन फज़लिका अ़ज़ीमी फाइन्नका तखदिरु वला अखदिरु वा तअ़लमु वला आ़लामु वा अन्ता अ़ल्लामुल ग़ुयूबी।  अल्लाहुम्मा इन कुन्ता तअ़लामु अन्ना हाज़ल अ़मरा क़ैरु्ली पी दीनी वा मअ़इ़शाती वा अ़खिबती अ़मरी वा आ़जिलिही फा यस्सिरहुली सुम्मा बारिकली फीही वा इन कुन्ता तअ़लामु अन्ना हाज़ल अ़मरा शर्रुल्ली फी दीनी वा मअ़ई़शाती वा आ़खिबाती अ़मरी अ़व खाला फी आ़जिली अ़मरी वा आ़जिलिही फसरिफहु अ़न्नी वसरिफनी अ़नहू वखदुर लियल खैरा हैसु काना सुम्मा अरज़िनी बिह।  

भाषांतरः- अए अल्लाह मैं तुझ से तेरे ज्ञान के द्वारा कुशल की इच्छा करता हुँ कयों के तू ही क़ुदरत रखता है तथा मैं क़ुदरत (क्षमता) नहीं रखता तथा तू ही जानता है।  मैं नहीं जानता तथा तू अदृष्ट व परोक्ष को जान्ने वाला है। अए अल्लाह यदि तेरे ज्ञान में ये कर्म मेरे लिए मेरे धर्म, मेरे जीवन तथा मेरे परिणाम के मामले में श्रेष्ठतर है तो तू इस को मेरे लिए भाग्य में कर तथा इसको मेरे लिए सरल व सुगम फरमादे फिर इस में मेरे लिए बरकत प्रदान कर।  यदि मेरे ज्ञान में ये कर्म व कार्य मेरे लिए धर्म, मेरे जीवन तथा मेरे परिणाम के मामले में बुरा है तो इस को मुझ से फेर दे तथा मुझ को इस से फेर दे तथा मेरे लिए जहाँ कही भी हो भलाई प्रदान कर तथा इस पर मुझ को संतुष्ट कर दे।  इस के बाद वे अपनी आवश्यकता पेश करें।  

“इस्तिखारा” का अर्थ कुशल की इच्छा करना है।  इस्तिखारा की नमाज़ के द्वारा बन्दा अल्लाह तआ़ला के दरबार में दुआ़ गो होता है के यदि ये मामला व समस्या मेरे अधिकार में श्रेष्ठतर है तो मेरे लिए भाग्य में कर तथा यदि मेरे अधिकार में अयोग्य व दुःखद है तो इस को मुझ से फेर दे तथा मुझ को इस से फेर दे एवं जो कुशल व भलाई है इसे मेरे भाग्य में कर दे।  

इस्तिखारा की दुआ़ की स्वीकृत होने की अनेक लक्षण होते हैं।  सपने के द्वारा संकेत व इशारा होता है या इस मामले से संबंध परिस्थिति व अवस्था इशारा करते हैं उदाहरण यदि वे मामला श्रेष्ठतर हो तो इस की ओर आकर्षित व संबद्ध बढ़ती है।  

असरलता व कठिनाई होती है या इस मामले के लिए साधन व माध्यम उपलब्ध होते हैं।  समस्याएं व कठिनता दूर होती हैं तथा यदि वे मामला अकुशल हो तो इस में रुकावटें आती हैं।  

सपने के द्वारा दुआ़ व प्रार्थना की स्वीकृत या स्वीकार होने के संकेत स्पष्ट रूप से मालूम होते हैं।  यदि पुरुष सपने में रोशनी या हरियाली देख तो कुशल है तथा यदि कालापन व अंधेरा देखे तो अकुशल है इस से दूर रहना चाहिए।  

जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 01, किताबुस सलाह में उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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