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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण > सजदे सहू का विषय

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f:1575 -    नमाज़ में एक से अधिक गलतियां हो जाएं तो क्या एक ही सजदा सहू काफी है?
Country : स्पेन,
Name : मुशर्रफ
Question:     माशाल्लाह आप की साइट से मुझ को और मेरे मित्रों को बहुत लाभ हुआ है। मेरा एक प्रश्न हैः नमाज़ में एक स अधिक गलतियां हो जाएं तो क्या एक ही सजदा काफी है?  शीघ्र उत्तर प्रदान करें तो आभारी रहुंगा।
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Answer:     नमाज़ में प्रत्येक प्रकार की गलती से सजदा सहू वाजिब व अनिवार्य नहीं हता उदाहरण किसी मुसतहब या मसनून (निर्धारित व श्रेष्ठतर) कर्म छूटने पर सजदे सहू अनिवार्य नहीं आता।  हाँ वाजिब छूटने से, उदाहरणः खिरात में- सुरे फातिहा एवं ज़म्मे सुरा, तशहुद आदि का छूट जाना।  

वाजिब के बदल कर बैठना- उदाहरणः जेहरी (बुलंद आवाज़ से) नमाज़ में आहिस्ता पढ़ना, रुक्न के विलम्भ पर- उदाहरणः 4 रकात वाली नमाज़ के पूर्व खअ़द में तशहूद से अधिक पढ़ जाना जिस कारण से तीसरी रकात के खियाम में विलम्भ हो जाए।  रूक का इधर-उधर कर लेना- उदाहरण जैसे रुकू से पूर्व सजदा कर लेना, रुक्न की तकरार- उदाहरणः एक रकात में 3 सजदे करना, इन परिस्थितियों में सजा सहू अनिवार्य हो जाता है।

यदि नमाज़ में एक से अधिक गलतियां हो जाएं जिस से सजदा सहू वाजिब व अनिवार्य होता है तो एक बार सजदे सहू कर लेना काफी है परन्तु ये बात बुद्धि में रख लें के हनफी फिक़्ह के हदीसों के आधार में सजदा सहू का तरीका ये है के अत्हयात पढ़ कर दाहिने ओर सलाम फेर दें फिर इस के बाद 2 सजदे करें फिर अत्हयात, दुरूद इबराहीम, मासूरा दुआ़ पढ़ कर सलाम फेर दें।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 126 पर तथा अधिक 130 पर भी उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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