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فتاویٰ > इबादत > नमाज़ का विवरण > सजदे सहू का विषय

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f:1571 -    जम्मे सुरा से पूर्व रुकू कर ले तो क्या आदेश है?
Country : पाकिस्तान,
Name : सैय्यद मुहम्मद अज़ीज़ जावीद खादरी
Question:     अस्सलामु अलैकुम, मुफती साहब नमाज़ी यदि सुरे फातिहा के बाद रुकू में जा रहा हो तथा सम्पूर्ण ना झुका हो तथा दुबारा खियाम में आ कर सुरे इक़लास या कोई सुरा पढ़े तो क्या आदेश है?  चाहे फर्ज़ नमाज़ हो या वाजिब, सुन्नत या नफ्ल।
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Answer:     वालैकुम अस्सलाम वरहमतुल्लाहि वबरकातुह!  रुकू का अर्थ झुकने के हैं।  रुकू का छोटा सा दर्जा ये है के हाथ इस प्रकार बढ़ाएं के घुटनों तक पहुंच जाएं।  इस से कम झुकें तो इस पर रुकू का इतलाफ नहीं होता, यदि कोई उपर्युक्त वर्णन संख्या से कम झुका हो तो या वे खियाम मं ही रहा, सीधा खड़ा हो कर ज़म्मे सुरा पढ़े तथा मामूल के अनुसार नमाज़ संपादन करें, सजदा सहू करेन की अवश्यकता नहीं, चाहे फर्ज़, वाजिब नमाज़ हो या सुन्नत व नफ्ल हो, सब का यही आदेश है।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 70 में उल्लेख है।  

तथा यदि इस प्रकार झुके के हाथ लम्बे करने से घुटनों तक पहुंचते हों तब भी वापस खियाम में आए कोई सुरा पढ़ कर रुकू करे तथा सजदे सहू कर लें।  जैसा के रद, किताबुस सलाह में उल्लेख है।  

तथा इसयदि

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,


प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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