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f:1515 -    रफअ़ यदैन हदीसों के आधार पर
Country : करीम नगर, हैद्राबाद,
Name : मुहम्मद इलयास अहमद
Question:     हज़रत मुफती साहब मैं रफअ़ यदैन से संबंधित हदीसों के आधार पर उचित विषय मालूम करना चाहता हुं।  बहुत से लोग हनफी फिक़्ह पर विरोध करते हैं के इस के मसाइ़ल खियास के द्वारा साबित किए हुए हैं।  कृपया विस्तार से उत्तर प्रश्नः करें।
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Answer:     अल्लाह तआ़ला ने हमें अपनी सन्तुष्टि व प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए इ़बादतों के प्रावधान व अहकाम दें एवं इ़बादतों के संपादन का तरीका तथा विस्तार अपने हबीब पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम के जिम्मे कर दिया।  

आप के पावन जीवन को सारे विश्व वालों के लिए आदर्श घोषित किया.  इ़बादतें इसी समय उचित घोषित पाएंगे जबके इन्हें आप के बतलाए हुए तरीके पर संपादन किया जाए।  

इमाम आज़म अबु हनीफा रहमतुल्लाहि अलैह तथा इमाम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह के पास रफअ़ यदैन तकबीर तहरीमा के अतिरिक्त रुकू में जाने से पूर्व तथा उठने के बाद भी है।  

सम्पूर्ण इमाम अखीदे व धर्म के अवश्यकता तथा सिद्धांत पर निश्चिंत हैं किन्तु इन के माबैन फुरूअ़ अंतर पाया जाता है तथा प्रत्येक इमाम के पास अपने मसलक (मत) के अनुसार में दलील उपलब्ध है।  इसी लिए बावजूद अंतर के कोई किसी पर तअ़न नहीं करते तथा आपस में मुहब्बत व पृथकता के साथ रहते हैं।  

कुछ क्षेत्र से हनफी फिक़्ह पर विरोध किया जा रहा है के ये केवल राय व विचार (खियास) की बुनियाज पर है हालांकि प्रत्येक इमाम के पास के मसलक की प्रशंसा में हदीस पाक उपलब्ध है।  इसी सिलसिले में देक्कन के आदरणीय व माननीय अनुवादक हज़रत मुहद्दिस देक्कन अबुल हसनात सैय्यद अबदुल्लाह शाह नक्षबंदी मुजद्दिदी खादरी रहमतुल्लाहि अलैह ने हदीस की फन में एक गौरवमय व प्रतिष्ठापूर्ण पुस्तक ज़ुजाजातुल मसाबीह के नाम से लिखी है।  

हज़रत मुहद्दिस देक्कन रहमतुल्लाहि अलैह ने सहीह मुसलिम, जामेअ़ तिरमिज़ी, सुनन निसाई, सुनन अबु दाउद, मुसनद इमाम आज़म अबु हनीफा, मुसनफ इ़ब्न अबी शैबा, मोअ़ता इमाम मुहम्मद, किताबुल आसार, तहावी, इब्न अ़दी, बैहखी आदि हदीस के पुस्तकों से रिवायतें व्याख्या की के नमाज़ में तकबीर तहरीमा के अतिरिक्त रफअ़ यदैन नहीं है।  

अन्य हदीसों में जो रफअ़ यदैन का वर्णन आया है वह इ़माम आज़म अबु हनीफा रहमतुल्लाहि अलैह तथा इमाम मालिक रहमतुल्लाहि अलैह की अनुसंधान में फुसूख है तथा इमाम शाफअ़ एवंइमाम अहमद रहमतुल्लाहि अलैह मजमई़न अपने अनुसंधान के बिना पर इसी पर अ़मल करते हैं।  

जैसा के सहीह मुसलिम में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत जाबेर बिन समरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से वर्णित है इन्हों ने फरमाया हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम हमारे पास आए तथा निर्देश कियाः क्या कारण है के मैं तुम लोगों को देख रहा हुं के रफअ़ यदैन कर के अपने हाथों को शरीर घोड़ों की दुमों के प्रकार बार-बार हिलाते रहते हो।  नमाज़ में विश्राम तथा निश्चिंत से रहा करो।  

(सहीह मुसलिम, किताबुस सलाह, हदीस संख्याः 651)  

जैसा के जामेअ़ तिरमिज़ी, सुनन अबु दाउद तथा सुनन निसाई में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत अ़लखमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा से वर्णित है इन्हों ने फरमाया के इब्न मसऊ़द रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हम से फरमाया के क्या मैं तुम लोगों को हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की जैसी नमाज़ ना पढ़ाउँ?  हज़रत अ़लखमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा का वर्णन है के इ़ब्न मसऊ़द रज़ियल्लाहु तआला अन्हु नमाज़ हमें ये कह कर नमाज़ पढ़ाई तो एक ही बार केवल तकबीर तहरीमा के समय हाथ उठाए।  

(जामेअ़ तिरमिज़ी, किताबुस सलाह, हदीस संख्याः 238 / सुनन अबु दाउद, किताबुस सलाह, हदीस संख्याः 639 / सुनन निसाई, हदीस संख्याः 1048)  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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