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f:1504 -    सरंचना व निर्माण-कार्य के दौरान चप्पल पहन कर मसजिद में आना?
Country : बैंगलोर, भारत,
Name : अ़ली खुरैशी
Question:     एक प्राचीन मसजिद की संरचना हो रही है।  जिसका भवन कमजोर हो चुका था।  इस को शहीद कर के नवीन भवन बना जा रहा है।  इस दौरान मसजिद के एक भाग में जमात के साथ नमाज़ संपादन किया जा रहा है।  मसजिद के जिस स्थान पर रचना का सामान व साधन है वहां कुछ लोग जूते, चप्पल पहन कर जमात के साथ आ रहे हैं क्या प्राचीन भवन शहीद करने के बाद नवीन भवन रचना होने तक जूते चप्पल पहन कर मसजिद में आना श्रेष्ठ है?
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Answer:     मसजिद इबादत व अल्लाह के ज़िक्र का स्थान है।  इसे अपवित्रता व गंदगी से पवित्र व शुद्ध रखना अवश्य है।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 05, पः 321 में उल्लेख हैः-

भाषांतरः- मसजिद को अपवित्रता व अशुद्धता से पवित्र रखना चाहिए।  मसजिद जब एक बार नमाज़ पढ़ने के लिए विशेष कर दी गई हो इसका सम्मान व आदर प्रत्येक स्थिति में अवश्य है।  चाहे मसजिद की प्राचीन रचना शहीद कर दी गई हो या बाखी हो, या सम्पूर्ण हो चुकी हो।  

रचना के दौरान मसजिद के भाग ही रहता है इस के सम्मान व आदर में थोड़ा सा भी अंतर नहीं आता इस लिए हर परिस्थिति में चप्पल या जूता पहन कर मसजिद में आना मकरूह है।  

अर्थात जैसा के फतावा आलमगिरी, किताबुल कराहयह में उल्लेख है।  

अर्थात मसजिद के जिस स्थान पर निर्माण-कार्य का सामान उपलब्ध है वहां जूते चप्पल पहन कर आना शरन श्रेष्ठ नहीं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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