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f:1500 -    इखामत के बाद विराम व विलम्भ हो जाए तो क्या आदेश है?
Country : भारत,
Name : हाफिज़ आ़रिफ उद्दीन
Question:     हमारे मुहल्ले की मसजिद में नमाज़ के लिए इखामत के समय अचानक माइक खराब हो गया, लोगों की संख्या अधिक होने के कारण से माइक का प्रबन्ध भी अवश्य था।  इखामत होने के कुछ देर बाद माइक श्रेष्ठ हुआ एवं नमाज़ संपादन की गई।  प्रश्न ये है के क्या इखामत के बाद इतनी देर ठहरना श्रेष्ठ है या देर होने के कारण दोबारा इखामत कहना चाहिए?
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Answer:     अज़ान के द्वारा नमाज़ जमात के साथ का सामूहिक रूप से घोषणा करने के बाद जब इखामत कही जाती है तो इससे मसजिद में उपस्थित मुसल्लियों को ये बतलाना उद्देश्य है के जमात खडी हो चुकी है।  

अर्थात इखामत तथा जमात के प्रारम्भ में लम्बा अंतर आए तथा नमाज़ के प्रारम्भ में विलम्भ व विरामहो जाए तो इखामत बातिल (गलत व झूठी) हो जाती है।  इस लिए दोबारा इखामत कह लें।  

तथा यदि साधारण सा अंतर हो तो इखामत को ठहराने की अवश्यकता नहीं, लम्बा अंतर तथा साधारण विराम काल के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए अ़ल्लामा इब्न आबेदीन शामी नक्षबंदी रहमतुल्लाहि अलैह लिखते हैं-

भाषांतरः- इखामत को दुहराना इस समय श्रेष्ठ नहीं जब अज़ान व इखामत के बीच लम्बी वार्तालाप या ऐसा लम्बा कर्म स्थापित ना हो जिस से सजदे तिलावत के लिए मजलिस बदल जाती है।  

(रद्दुल मुहतार, किताबुस सलाह, बाबुल अज़ान)  

आप की मसजिद में शुक्रवार व जुमआ़ की नमाज़ के अवसर पर जब माइक खराब हुआ तो इखामत के बाद नमाज़ का प्रारम्भ करने में कितना विलम्भ व विराम हुआ?  यदि साधारण सा विराम हुआ था तो इखामत दोहराने की अवश्यकता नहीं तथा यदि लम्बा अंतर हुआ हो तो दुबारा इखामत कहना चाहिए।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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