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f:1498 -    इखामत किस स्थान पर कही जाए?
Country : भारत,
Name : सैय्यद अदनान खादरी
Question:     क्या एक मोअ़ज़िन या कोई और, इखामत देते हुए कहीं भी खड़ा हो सकता है या फिर इसे इमाम के पीछे खडा होना होगा?  कुछ मसजिदों में ये देखने में आया है के मोअ़ज़िन इसी माइक में इखामत देता है जिस में अज़ान दी गई थी क्यों के मोअ़ज़िन के लिए अलग माइक नहीं है तथा ये स्थान सामान्य रूप इमाम से आगे होती है एवं इखामत के बाद देने के वह वापिस आकर इमाम के पीछे खडा हो जाता है, क्या ये जाइज़ है?
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Answer:     इखामत क्यों के मसिजद में उपस्थित लोगों को जमात की सूचना के लिए कही जाती है इस लिए मसजिद के भीतर इखामत कहना प्रशंसनीय (मुसतहब) है जब के अज़ान, सामान्य रूप से सम्पूर्ण उपस्थित व अनुपस्थित लोग को सूचना देने के उद्देश्य से कही जाती है।  

अर्थात अज़ान बाहर कहना मुसतहब व प्रशंसनीय है, इखामत मसजिद के भीतर किसी भी स्थान परकही जा सकती है।  जिस स्थान पर अज़ान कही गई हो इस से हट कर दूसरी स्थान इखामत कहना श्रेष्ठतर है।  

अधिक इमाम के तुल्य स्थान में पीछे की ओर कही जाए क्यों के हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम पावन मुसल्ली (जानिमाज़) के पीछे, सफ में खडे हो कर इखामत कहा करते थे।  

अतः किसी कारण से यदि इमाम के आगे वाले माइक में इखामत कह ले तो इखामत उचित हो जाएगी परन्तु ये श्रेष्ठतर नहीं है।  इस के बाद मोअ़ज़िन, इमाम के पीछे वाली सफ में आ जाए।  जैसा के रद्दुल मुहतार, जिल्द 01, किताबुल सलाह, बाबुल अज़ान पः 287 में उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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