***** For other Fatawa, please click on the topics on the left *****



विषय की सूची

FATAWA > Search FAQ

Share |
f:1491 -    फर्ज़ नमाज़ के संपादन के बाद अज़ान कहना
Country : भारत,
Name : सैय्यद सिराज उद्दीन
Question:     जिन नमाज़ों के समय में गुंजाइश व योग्यता है, इन नमाज़ों के लिए कुछ मसजिदों में जमात का समय एक डेढ़ घंटे के अंतर से स्थापित किया जाता है।  उन मसजिदों के मोज़िन लोग कभी-कभी कार्यरत व्यस्त के कारण से दूसरी मसजिद में आरम्भ समय नमाज़ पढ़ लेते हैं तथा अपनी मसजिद में केवल अज़ान कह कर चल जाते हैं।  क्या मोज़िन लोग का ये कर्म श्रेष्ठ है?
............................................................................
Answer:     अज़ान केवल फर्ज़ नमाज़ों के लिए आधारित है।  नफीलों के लिए जाइज़ नहीं।  मोज़िन लोग अज़ान कह कर लोगों को फर्ज़ नमाज़ जमात के साथ पढ़ने का निमन्त्रण व निर्देशन देते हैं।  

यदि मोज़िन साहब किसी मसजिद में फर्ज़ नमाज़ संपादन कर लें तथा फिर उस मसजिद में अज़ान कहें जहाँ वह अज़ान कहने की सेवा परिणाम दे रहे हैं तथा नमाज़ पढ़े बिना चले जाएं तो उन का ये कर्म शरीअ़त के आधार पर श्रेष्ठ नहीं।  

रद्दुल मुहतार, जिल्द 01, पः 592 में एक मोज़िन का दो मसजिदों में नमाज़ पढ़ने से संबंधित एक विषय वर्णन किया गया हैः-

भाषांतरः- जब कोई मोज़िन प्रथम मसजिद में नमाज़ संपादन कर ले तो दूसरी मसजिद में इस की अज़ान नफ्ल होगी तथा नफ्ल अज़ान शरन जाइज़ नहीं एवं अज़ान फर्ज़ नमाज़ के लिए है जब के वह दूसरी मसजिद में नफ्ल नमाज़ संपादन कर रहा है तो इस के लिए श्रेष्ठ नहीं के वह लोगों को फर्ज़ नमाज़ की ओर बुलाए एवं खुद इन के साथ फर्ज़ नमाज़ समापन ना करें क्यों के एक नमाज़ दो बार फर्ज़ के रूप संपादन नहीं की जा सकती।  दूसरी बार नफ्ल घोषित होती है।  

उपर्युक्त वर्णन मसले से स्पष्ट होता है के जब दूसरी मसजिद में नमाज़ संपादन करने का उद्देश्य हो तब भी अज़ान कहना श्रेष्ठ नहीं तो इस व्यक्ति का अज़ान कहना क्यों के श्रेष्ठ हो सकता है जो अज़ान कहने के बाद मसजिद में जमात के साथ नमाज़ समापन करे बिना जाना चाहता है।  तथापि वह प्रथम किसी मसजिद में फर्ज़ नमाज़ संपादन कर चुका हो।  

इस से कई खराबी अनिवार्य आती हैः-

(1)- एक मसजिद में नमाज़ संपादन करने के बाद दूसरी मसजिद में अज़ान नफ्ल होगी जबके अज़ान नफ्ल के रूप में जाइज़ नहीं।  

(2)- दूसरी मसजिद में अज़ान कहना नफ्ल के लिए होगा जबके नवाफिल के लिए अज़ान श्रेष्ठ नहीं।  

(3)- दूसरी मसजिद में अज़ान कहने वाला जो फर्ज़ नमाज़ पढ़ने का निर्देश व उपदेश दे रहा है, वह खुद इस पर अ़मल व प्रदर्शन नहीं कर रहा।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
All Right Reserved 2009 - ziaislamic.com