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f:1490 -    फिल्म का नाम “अज़ान” रखना कैसा है?
Country : अमरीका,
Name : मुहम्मद अहसानुल हक़
Question:     पूर्व शुक्रवार एक फिल्म व चलचित्र रिलीज हुई जिस का नाम “अज़ान” रखा गया, ये फिल्म हैद्राबाद के कई स्थान पर दिखाई जा रही है।  आज कल जो फिल्में बनाई जाती हैं, उन में अश्लीलता की चित्रें तथा निर्लज्ज प्रतिमा दिखाए जाते हैं।  “अज़ान” के नाम से ऐसी फिल्म रिलीज़ व निर्मोचन करने का क्या आदेश है?  जबके इसी नाम से मुसलमान सारे विस्व में सवेरे व शाम पांच बार नमाज़ के लिए निमन्त्रण देते हैं।  कृपया इस का निश्चिंत उत्तर दें।
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Answer:     “अज़ान” इसलाम के प्रतीक से है तथा अज़ान कहना, इसलाम स्वीकार करने की दलील है।  

(बदाअ़ उस सनाअ़, किताबुल सियाेर)  

इसी प्रकार की इ़बारतें माननीय फुक़्हा किराम (धर्मशास्त्रज्ञ व विधिवेत्ता) ने लिखी हैं जिन में फतावा अन नवाज़िल के लेखक इमाम अबुल लैस समरखंदी हनफी रहमतुल्लाहि अलैह (देहान्तः 375 हिज्री), अ़ल्लामा इब्न खुद्दामा हंबली रहमतुल्लाहि अलैह (देहान्तः 620 हिज्री), सहीह मुसलिम के शरह के लेखक इमाम नववी शाफई़ (देहान्तः 676 हिज्री) रहमतुल्लाहि अलैह, मालकी फुक़्हा अल्लामा अहमद बिन मुहम्मद सावी रहमतुल्लाहि अलैह (देहान्तः 1241 हिज्री) रद्दुल मुहतार के लेखक अल्लामा इब्न आबिदीन शामी रहमतुल्लाहि अलैह (देहान्तः 1252 हिज्री) तथा अन्य फुक़्हा किराम शामिल हैं।  

(फतावा नवाज़िल, किताबुल सलाह, बाबुल अज़ान / अल काफी फि फुक़्हा अल इमाम अहमद, किताबुस सलाह, बाबुल अज़ान / शरह सहीह मुसलिम मुल्ला इमाम नववी, किताबुस सलाह / हाशिय अस सावी अल शरह अल सग़ीर, किताबुस सलाह / रद्दुल मुहतार, किताबुस सलाह बाबुल अज़ान)  

चलचित्र व फिल्म में बहुत सारे इसलामी निषिद्ध व वर्जित होते हैं जैसे अश्लीलता व निर्लज्जता, नाच-गाना, छल-कपट, अमर्यादा व अतिक्रम आदि इस कारण से फिल्म शरन निषिद्ध व वर्जित तथा नाजाइज़ है।  

“अज़ान” के नाम से जो फिल्म बनाई गई जैसा के आप ने प्रश्न में वर्णन किया है।  ये वास्तव में इसलाम के प्रतीक के सतीत्व को बदनाम करने तथा इसलामी प्रावधान के उत्तमता व वैभव को घटाने के बराबर है।  

अज़ान वास्तव में स्वयं इसलामी शब्दों तथा इसलामी कानून का एक सम्मान के योग्य कलिमे है।  इस के द्वारा ऐसी विशाल इ़बादत का निमन्त्रण दिया जाता है जो प्रत्येक प्रकार के अश्लील व निर्लज्ज तथा बुराई से रोकता है तथा ज़ाहिर व बातिन को पवित्रता व शुद्धता प्रदान करता है।  

जैसा के अल्लाह तआ़ला का इरशाद हैः-

भाषांतरः- निस्संदेह नमाज़ अश्लीलता तथा बुराई से रोकती है।  

(सुरह अल अनकबूतः 29:45)  

अपर्युक्त वर्णन के आधार पर अज़ान शब्द पर अश्लील चित्रों, निर्लज्जता की तसवीरों वाली तथा गाने-बजाने पर आधारित फिल्म का नाम “अज़ान” नहीं रखना चाहिए।  ये ना इसलामी शरीअ़त में जाइज़ है।  ना बुद्धि के दृष्टि से श्रेष्ठतर है एवं ना देश के नीयम व कानून के अनुसार से उचित है।  

क्यों के हमारा जनतन्त्रीय व लोकतान्त्रिक देश इसलाम धर्म के सम्मान को बदनाम करने और इस के आदर से खिलवाड़ करने की किसी को आज्ञ नहीं दे सकता।  

अर्थात फिल्म निर्मात को इन हरकतों से दूर रखने के लिए कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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