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f:1489 -    हैज़ की दिनों में सुनी हुई सजदे की आयतों का आदेश
Country : परभनी, भारत,
Name : हाजिरा परवीन
Question:     मैं ने वेबसाइट पर फतावा संभाग में पढ़ा के लड़कियां अपने मासिक-धर्म के दिनों में ना ज़बानी क़ुरान करीम की तिलावत कर सकती हैं तथा ना क़ुरान को छू सकती हैं।  इस से हमें बहुत लाभ हुआ।  हमारे समाज में बहुत सी महिलाएं इस विषय से अपरिचित व अज्ञात थीं।  ये उत्तर पढ़ने के बाद मेरे बुद्धि में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ के ऐसे समय महिला किसी को सजदे की आयत तिलावत करते हुए सुने तो क्या इस को अपने दिन गुज़रने के बाद सज़दा तिलावत करना चाहिए?
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Answer:     महिला अपने हैज़ के दिनों में किसी तिलावत करने वाले व्यक्ति से सजदे की आयत सुन ले तो इस पर सजदा तिलावत अनिवार्य व वाजिब नहीं होता।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 38 में हैः-  

भाषांतरः- हैज़ वाली महिलाएं सजदे की आयत सुन ले तो इस पर सजदा-तिलावत वाजिब नहीं।  अर्थात हैज़ के दिनों में सुनी हुई सजदे की आयतें के कारण से तहारत व पवित्रता की स्थिति में सजदे-तिलावत शरीअ़त के दृष्टि में अनिवार्य व अवश्य नहीं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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