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f:1488 -    मासिक-धर्म में हाफिज़ लड़कियों की तिलावत का आदेश
Country : सई़दाबाद, हैद्राबाद, भारत,
Name : सुमैया बतूल
Question:     मैं हिफ्ज़ क़ुरान के एक मदरसे में पढ़ती हुं।  मैं ने मदरसे में देखा के कुछ लड़कियां मासिक-धर्म में भी तिलावत कर रही हैं।  मैं ने इन्हें मना किया तथा कहा के लड़कियां इन दिनों में तिलावत नहीं कर सकती तो इन लड़कियों ने कहा के हम ने सुना के क़ुरान को हाथ लगाए बिना केवल ज़बान से तिलावत कर सकते हैं।  पावन शरीअ़त में इस का क्या आदेश है?  स्पष्ट करें, कृपया होगी।
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Answer:     इसलामी शरीअ़त में महिला के लिए इस के मासिक-धर्म के दिनों में जिस प्रकार नमाज़ संपादन करना तथा रोज़ा रखना नाजाइज़ रखा गया, इसी प्रकार क़ुरान करीम को छून तथा तिलावत करने को भी निषिद्ध घोषित किया गया चाहे ज़बानी तिलावत करे या देख कर करे सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने हैज़ वाली महिला तथा जनाबत वाले व्यक्ति को क़ुरान करीम की तिलावत करने से मना किया।  तथापि जामेअ़ तिरमिज़ी, जिल्द 01, पः 34 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं आप ने आदेश फरमायाः हैज़ वाली महिला तथा जनाबत वाले व्यक्ति क़ुरान करीम की तिलवात ना करें।  

जो लड़कियां मासिक धर्म के दिनों में तिलवात कर रही हैं इन का ये कर्म शरीअ़त के दृष्टि से पाप घोषित पाता है।  इन्हें दिनों में तिलवात करने स दूर रहना चाहिए।  अर्थात आप का इन लड़कियों को मासिक-धर्म में तिलवात करने से रोकना शरीअ़त के आदेश के अनुसार है।  माँ तथा अध्यापिका की ज़िम्मेदारी बनती है के वह लड़कियों की शिक्षा व परवरिश करें।  इन्हें इन के प्रावधान की शिक्षा दे तथा मसाइ़ल से अनुभव करवाएं।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 38 पर उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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