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f:1487 -    क्या महिला अपने मासिक-धर्म में क़ुरान करीम छू सकती है?
Country : पाकिस्तान,
Name : फरहाना
Question:     क्या महिला अपने मासिक-धर्म में क़ुरान करीम छू सकती है?  या बिना हाथ लगाए तिलावत कर सकती है?
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Answer:     हदीस शरीफ इस से संबंधित वर्णन हैः-

भाषांतरः- हज़रत अबदुल्लाह बिन उ़मर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है- सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः हैज़ वाली महिला व अपवित्र व अशुद्ध व्यक्ति क़ुरान करीम का का कोई भाग तिलावत ना करें।  

(जामे तिरमिज़ी, जिल्द 01, पः 34, हदीस संख्याः 131 / सुनन इब्न माजह, पः 44 / सुनन दारख्खुतनी, जिल्द 01, पः 291, हदीस संख्याः 412 / सुनन कबुरा लिल बैहखी, जिल्द 01, पः 461, हदीस संख्याः 1479)  

अर्थात हैज़ व निफास तथा जनाबत की स्थिति में क़ुरान का छूना तथा तिलावत करना जाइज़ नहीं है किन्तु क़ुरान ऐसे गिलाफ में है के इस को मुसहफ शरीफ से अलग किया जा सकता हो तो ऐसी स्थिति में बेवुज़ू तथा जनाबत की स्थिति में छू सकते हैं।  

हाथ में ले कर कहीं रख सकते हैं, किसी को दे सकते हैं परन्तु उपर्युक्त वर्णन हदीस शरीफ के आधार में क़ुरान करीम चाहे अधिक संख्या में हो या कम संख्या में जनाबत की स्थिति में तिलावत करना जाइज़ नहीं।  अगरचे हाथों में दस्ताने पहन कर ही क्यों ना हो, किन्तु दुआ़ पर निर्धारित कथन ज़िक्र के रूप में दुआ़ पढ़ने में कोई निषिद्ध नहीं।  जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 38-39 में उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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