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f:1480 -    अपवित्रता की स्थिति में खाना, पीना तथा ज़िक्र करना कैसा है?
Country : भारत,
Name : अबदुल मुक़ीत
Question:     महिलाएं अपवित्रता व अशुद्धा की स्थिति में क्या कलिमे तैयिबा पढ़ सकती हैं इसी प्रकार अन्य ज़िक्र व दुआएं पढ़ने के बारे में शरीअ़त का क्या आदेश है?
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Answer:     शरीअ़त के प्रावधान के आधार पर महिलाएं अपवित्रता व अशुद्धता (जिस में स्नान अवश्य है) की स्थिति में क़ुरान की तिलावत तो नहीं कर सकती हैं।  जैसा के सुनन तिरमिज़ी जिल्द 01, पः34 में हदीस हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबुदल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं आप ने फरमाया मासिक धर्म वाली तथा अपवित्र महिलाएं क़ुरान की तिलावत ना करें, अतः दुआएं तथा ज़िक्र आदि पढने में इन के लिए कोई समस्या व निषिद्ध नहीं है।  जैसा के शरह वखाय जिल्द 01, पः 116 में हैः-

भाषांतरः- सारे दुआएं तथा ज़िक्र आदि पढने में कोई समस्या नहीं है।  परन्तु इतनी बात अवश्य है के वह ज़िक्र व विर्द तथा कलिमे तैयिबा आदि पढ़ने के समय वुज़ू कर लें क्यों के ये इन के अधिकार में प्रशंसनीय व श्रेष्ठतर तथा शिष्टाचार में है।  जैसा के फतावा आलमगिरा, जिल्द 01, पः 38 पर है।  

भाषांतरः- मासिक धर्म वाली महिलाओं के लिए दुआएं पढ़ना तथा अज़ान का उत्तर देना एवं इस जैसी चीज़ें जाइज़ है।  दुर्रे मुहतार, जिल्द 01, पः 122 में हैः-

मासिक धर्म व हैज़ वाली महिला के लिए क़ुरान को देखने में कोई अनुचित बात नहीं क्यों के अपवित्रता व अशुद्धता आँख में सरायत नहीं करती।  अधिक दुआओं का पढ़ना मकरुह तहरीमी नहीं है किन्तु विशेष ज़िक्र के लिए वुज़ू कर लेना संस्तावय व प्रशंसनीय है।  और बेवुज़ू पढ़ना उचित के विरुद्ध तथा मकरूह तहरीमी है।  

अपवित्रता व अशुद्धता की स्थिति में हाथ, मुंह धो कर खाने पीने में कोई समस्या नहीं।  रद्दुल मुक़तार पः 123 में हैः-

भाषांतरः- जिसके लिए स्नान अवश्य है उसके लिए हाथ मुंह धो लेने के बाद खाना-पीन मकरूह नहीं है।  

शरह मअ़नी आसार जिल्द 01, पः 53 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत मालिक बिन अ़बादह ग़ाफखी रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है के इन्हों ने कहा रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम जनाबत की स्थिति में खाना बआ़म फरमाया मैं ने हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से इस का वर्णन किया तो आप मुझ को रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की सेवा में ले कर पहुंचे तथा निवेदन किए या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम इन्हों ने मुझ को बताया के आप ने स्नान की अवश्यकता व जनाबत की स्थिति में खाना खाया है।  तो आप ने आदेश फरमायाः हाँ!  जब मैं वुज़ू कर लेता हुं तो खाता तथा पीता हुं किन्तु नमाज़ नहीं पढ़ता एवं ना तिलावत करता हुं जब तक के सन्ना ना कर लुँ।  इस हदीस पाक से साबित होता है के स्नान की अवश्यकता व अपवित्रता व अशुद्धता की स्थिति में खाना-पीना व भोजन करना हो तो वह वुज़ू कर लें कम से कम हाथ-मुंह तो अवश्य धो लें।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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