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f:1472 -    रास्ते पर पेशाब करना?
Country : निज़ामाबाद,
Name : अरशद
Question:     साधारण तौर पर हमारे देश में देखने में आता है के किसी को रास्ते चलते पेशाब की अवश्यकता उत्पन्न हुई तो वह राह के किनारे पेशाब करता है, इस के बारे में इसलामी आदेश बतलाएं, कृपया होगी।
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Answer:     हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने रास्ते से तकलीफ देने वाले चीज़ों को दूर कनरे को इ़मान की एक डाल घोषित किया है।  अर्थात सरकार पाक सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश हैः-

भाषांतरः- इमान की सतर पर कुछ डालें हैं।  या फरमायाः साथ पर साठ पर चंद शाखें हैं, तो इन में सब से अधिक उत्तमता वाली डाल लाइलाहा इल्लाह कहना है तथा सब से कम स्तर की डाल रास्ते से तकलीफ देने वाली चीज़ें दूर करना है तथा हया व लज्जा इमान की डाल व शाख है।  

(सहीह बुखारी, किताबुल इमान, हदीस संख्याः 162)  

जिस स्थान पर लोग चलते हों वहाँ पर अपवित्रता व अशुद्धता, पेशाब व पाखाना का होना रास्ते पर चलने वालों के लिए तकलीफ का माध्यम है।  इस से वातावरण में गंदगी व अशुद्धता पैदा होती है एवं रोग व बीमारियां फैलने लगती हैं।  ऐसे स्थान पर पेशाब व पाखाना करना शरन मकरुह है।  हाँ बस्ती व आबादी के बाहर द्वार से किसी प्रकार अंतर पर मैदान या खुली धरती पर इस्तेंजा करने की योग्यता है।  क्यों के वहाँ बीमारियां फैलने की आशंका नहीं रहती तथा लोगों में भी उसे बुरा नहीं समझा जाता।  

जैसा के नूर उल इज़ाह, पः 32 पर उल्लेख है।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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