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f:1444 -    नमाज़ की स्थिति में बार-बार हवा निकलती हो तो क्या आदेश है
Country : हैद्राबाद, भारत,
Name : सैय्यद सिराज
Question:     मुझे एक प्रश्न करना है के मुझे पाद (अधोवायु) व गैस की बीमारी है।  जब मैं नमाज़ पढ़ता हुँ तो गैस बहुत आते हैं।  मैं रोकने की कोशिश करता हुं, यदि फिर भी निकल जाए तो क्या करना चाहिए?  कृपया उत्तर तुरंत प्रदान करें इस कारण से नमाज़ में मेरा ध्यान नहीं लग रहा है।
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Answer:     इसलाम धर्म सहजता व आसानी वाला धर्म है।  अल्लाह तआ़ला किसी भी व्यक्ति पर इस की क्षमता से अधिक बोझ नहीं ड़ालता।  ऐसे कार्य करने के लिए नहींकहता जो बन्दे की शक्ति से बाहर हों।  अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- अल्लाह तआ़ला किसी जीव पर बस उसकी सामर्थ्य और समाई के अनुसार ही दायित्व का भार डालता है।  

निश्चय हवा निकल जाना वुज़ू को तोड़ता है जब आप को गैस का रोग व बीमारी हो इस रूप से के किसी नमाज़ के पूर्ण समय में इतना समय ना मिलता हो के आप फर्ज़ नमाज़ इस तकलीफ से खाली हो कर संपादन कर सकें तो फिक़्ही दृष्टिकोण में आप मअ़ज़ूर (क्षम्य) हैं।  

इसलामी शरीअ़त ने विशेष छूट रकी है के आप प्रत्येक नमाज़ के समय ताजा वुज़ू कर लें तथा इस वुज़ू से इस समय में जितने चाहे फर्ज़ व नवापिल संपादन कर सकते हैं।  

जैसा के फतावा आलमगिरी, जिल्द 01, पः 40-41, किताबुल तहारह में उल्लेख है।  

अल्लाह तआ़ला की कृपा व दया से जब आप को किसी भी फर्ज़ नमाज़ के समय इतनी सुविधा मिल जाए के इस में आप बिना तकलीफ के फर्ज़ नमाज़ सरलता व आसानी के साथ संपादन कर सकते हों तो फिर आप मअ़ज़ूर के आदेश में नहीं होंगे।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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