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f:1429 -    वुज़ू के बाद आईने देखना
Country : करीम नगर, भारत,
Name : अबदुल हकीम
Question:     अस्सलामु अलैकुम! मेरे 2 प्रश्न हैं। कृपया शरीअ़त के आधार पर मार्गदर्शन करें।

(1)- वुज़ू करने के बाद आईने में देखने से क्या वुज़ू मकरुह व निषिद्ध हो जाएगा?
(2)- किसी की ज़बानी काली होती है तथा लोग कहते हैं के काली ज़बान वालों का कहा हुआ इनकी दुआ हो या बददुआ तुरंत स्वीकार हो जाती है तथा कभी ऐसा हो भी जाता है तो क्या ऐसा कहना उचित है?
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Answer:     (1)- वुज़ू करने के बाद दर्पण व आईने में चेहरा देखने को क़ुरान करीम व हदीस तथा फिक़्हा की पुस्तकों में कहीं भी नवाखिज़ (समाप्त) वुज़ू में शुमार नहीं किया गया तथा ना मकरुहात व निषेधाज्ञा में बतलाया गया।  अतेव इस से वुज़ू मकरुह व निषिद्ध नहीं होता।  

(2)- किसी की ज़बान काली होने का ताना देना जाइज़ नहीं तथा ना अशुभ व अमगंलकारी इसलाम में जाइज़ है।  सहीह बुखारी, जिल्द 01 में वर्णन हैः-

भाषांतरः- कोई बीमारी व रोग अशुभ नहीं होती, बदशगुनी जाइज़ नहीं, अलूव के और सफर के महीने में कोई नहूसत नहीं।  

(सहीह बुखारी, किताबुल लतब, हदीस संख्याः 5380)  

अल्लाह तआ़ला ही हर शय का मालिक है।  मानव को इस बात का आदेश दिया गया है के वह अपनी ज़बान की सुरक्षा करें, ज़बान से अल्लाह और इस के रसूल सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम की इच्छा की विरुद्ध कोई बात ना कहें।  अश्लील बातें, व्यर्थ व निर्थक वार्तालाप से दूर रहें, किसी के लिए बददुआ़ करने से भी दूर रहें।  

दुआ या बददुआ के स्वीकार होने या रद्द होने में काली ज़बानी की कोई प्रभाव व परिणाम नहीं।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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