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فتاویٰ > शिष्टाचार > पति-पत्नी के अधिकार

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f:1350 -    महिला के ज़िम्मे पति का अधिकार
Country : पाकिस्तान,
Name : मुहम्मद मुखीम उद्दीन
Question:     बहुत सी महिलाएं पति की अवज्ञा करती हैं जिस के कारण से पति के लिए घर में बेचैनी और अशांति व अधीरता की भावना रहती है।  पति पत्नी से नाराज़ रहता है।  इस सिलसिले में धन्य शरीअ़त महिलाओं के लिए क्या मार्गदर्शन देता है?
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Answer:     पति और पत्नी का आपस में स्नेह व प्रेम का नाता है और एक पत्नी अपने पति के लिए राहत और आराम, शान्ति व विश्राम का माध्यम होती है, अर्थात अल्लाह तआ़ला का आदेश हैः-

भाषांतरः- वही है जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया और इसी से इस की पत्नी बनाई ताकि उसकी ओर प्रवृत्त होकर शान्ति और चैन प्राप्त करे।

(सुरह अल आराफः 07:189)  

पत्नी अपने पति का आज्ञाकारी व निष्ठावन है और अनुपलब्धता व उपस्थिति में इस की अच्छाई चाहने वाली होती है।  सुनन इब्न माजह में सरकार दो आ़लम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम का धन्य आदेश हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबु उमामह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम से वर्णित करते हैं के आप ने आदेश फरमायाः मोमिन बन्दे ने अल्लाह के खौफ व भय के बाद नेक पत्नी से श्रेष्ठतर कोई वरदान व नेअ़मत नीं पाई के यदि वह उसे (पत्नी को) आदेश दे तो इस का आज्ञापालन करें।  यदि इसे देखे तो आकर्षित कर दे।  यदि इस पर कसम खाले तो इस की कसम पूरी करे और यदि इस से दूर हो तो अपनी ज़ात और पति के धन में कुशलता रखे।  

(सुनन इब्न माजह, किताबुल निकाह, हदीस संख्याः 1857)  

स्पष्ट रहे के हदीस पाक में पत्नी पर कसम खाने का वर्णन उदाहरण के रूप में है वरना अल्लाह तआ़ला के सिवा किसी की कसम जाइज़ नहीं।  

मिश्कातुल मसाबीह, पः 281 में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अनस रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है हज़रत नबी अकरम सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः महिला व नारी जब अपने पाँच समय की नमाज़ संपादन करे, रमज़ान के रोज़े रखे, गुप्तांग की सुरक्षा करे और पति की आज्ञपालन करे तो जन्नत के जिस दरवाज़े से चाहे प्रवेश हो जाए।  

जहाँ आज्ञाकीर व परोपकारी तथा उपकारक पत्नी के लिए ये गवाही हैवहीं अवज्ञाकारी और पति को नाराज़ करने वाली महिला के लिए चेतावनी हैं।  

सहीह बुखारी में हदीस पाक हैः-

भाषांतरः- हज़रत सैयदना अबु हुरैरह रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः जब पुरुष अपनी महिला को बिस्तर की ओर बुलाए और वह इन्कार करे तथा पति क्रोध व गुस्से कि स्थिति में रात गुज़ारे तो फरिश्ते इस (महिला) पर लानत करते हैं यहाँ तक वह सवेरे करे।  

(सहीह बुखारी, हदीस संख्याः 3237)  

शुअ़बुल इमान लिल बैहखी में हदीस पाक हैः-


भाषांतरः- हज़रत सैयदना जाबिर रज़ियल्लाहु तआ़ला अन्हु से वर्णित है, हज़रत रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वसल्लम ने आदेश फरमायाः 2 व्यक्ति ऐसे हैं ना इन की कोई नमाज़ स्वीकार की जाती है तथा ना कोई नेकी स्वीकार के लिए चढ़ती हैः भागा हुआ गुलाम यहाँ तक के अपने मालिक के पास लौट आए और अपना हाथ इन के हाथ में रख दे।  महिला जिस का पति इस से नाराज़ हो।  नशा करने वाला यहाँ तक के होश में आए।  

(शुअ़बुल इमान लिल बैहखी, हदीस संख्याः 8470)  

पत्नी को चाहिए के प्रत्येक तरीके से पति का आज्ञपालन कर के इस को संतुष्ट तथा प्रसन्न रखने की कोशिश करे और प्रत्येक स्थिति में इस के लिए कुशलता व अच्छा चाहे।  

{और अल्लाह तआ़ला सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखने वाला है,

मुफती सैय्यद ज़िया उद्दीन नक्षबंदी खादरी

महाध्यापक, धर्मशास्त्र, जामिया निज़ामिया,

प्रवर्तक-संचालक, अबुल हसनात इसलामिक रीसर्च सेन्टर}
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